Hyderabad Engineer Viral Reddit Post: 25 साल की सिविल इंजीनियर की Reddit पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें 6 दिन की नौकरी और 23000 सैलरी ने वर्क लाइफ बैलेंस पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
Hyderabad Engineer Reddit Post Viral: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक 25 वर्षीय सिविल इंजीनियर की पोस्ट ने इन दिनों काफी चर्चा बटोरी है। हैदराबाद में काम करने वाली यह महिला, जो 2023 बैच की B.Tech ग्रेजुएट है, ने अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि लगातार 6 दिन की वर्किंग शिफ्ट ने उसकी पर्सनल लाइफ और मेंटल हेल्थ दोनों को प्रभावित कर दिया है। उसने लिखा कि वह पिछले करीब तीन सालों से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रही है और उसकी नौकरी में हर हफ्ते 6 दिन काम करना अनिवार्य है। काम के बाद घर लौटकर उसके पास न तो परिवार के लिए समय बचता है और न ही खुद के लिए।

रविवार सिर्फ रिकवरी में निकल जाता है: इंजीनयर का दर्द
पोस्ट में महिला ने बताया कि रविवार का दिन भी आराम और थकान मिटाने में निकल जाता है, और सोमवार आते-आते फिर वही रूटीन शुरू हो जाता है। लगातार काम के दबाव ने उसे मानसिक रूप से थका दिया है। उसने यह भी लिखा कि वह हैदराबाद की एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में काम कर रही है और अब नौकरी बदलने की कोशिश कर रही है, भले ही इसके लिए उसे कम सैलरी ही क्यों न स्वीकार करनी पड़े, लेकिन वह 5 दिन के वर्क वीक वाली नौकरी चाहती है।
₹23,000 सैलरी और बढ़ता आर्थिक दबाव
चर्चा तब और तेज हो गई जब पोस्ट में बताया गया कि उसकी मासिक सैलरी लगभग ₹23,000 है। इसमें से ₹8,000 किराए में, ₹10,000 घर भेजने में और बाकी रकम ट्रांसपोर्ट व जरूरी खर्चों में खत्म हो जाती है। ऐसे में बचत लगभग नामुमकिन हो जाती है। नीचे देखें पोस्ट-
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने उसे सपोर्ट करते हुए कहा कि यह देश के सिस्टम की कमी है और बेहतर अवसर ढूंढने चाहिए। वहीं कुछ ने सुझाव दिया कि स्किल अपग्रेड करके बेहतर कंपनियों में स्विच करना ही एकमात्र रास्ता है। एक यूजर ने लिखा कि 6 दिन की वर्किंग खासकर शुरुआती करियर में काफी कठिन हो सकती है, जबकि दूसरे ने विदेश जाने या बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी।
बड़ा सवाल: क्या भारत में बदल सकता है वर्क कल्चर?
यह मामला एक बार फिर भारत के कंस्ट्रक्शन और कई अन्य सेक्टर्स में वर्किंग कंडीशंस पर सवाल खड़े करता है। बढ़ते काम के घंटे, कम सैलरी और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल यह पोस्ट सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की आवाज बन गई है जो लंबे काम के घंटों और सीमित जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


