फिल्म इंडस्ट्री में सफल होने के बाद गुलशन कुमार ने अपनी कमाई का एक हिस्सा सोशल काम में खर्च किया। उन्होंने वैष्णो देवी आने वाले भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन शुरू कराया था, जो आज भी चलता है।

मुंबई। टी-सीरिज के फाउंडर गुलशन कुमार की आज (12 अगस्त) 22वीं डेथ एनिवर्सरी है। 1997 में आज ही के दिन अंधेरी के जीतेश्वर महादेव मंदिर के सामने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। कहते हैं कि गुलशन ने अंडरवर्ल्ड की जबरन वसूली की मांग के सामने झुकने से इंकार कर दिया था, जिसकी वजह से उनकी हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि अबु सलेम ने गुलशन कुमार से जब हर महीने 5 लाख रुपए देने के लिए कहा तो गुलशन कुमार ने इनकार करते हुए कहा था कि इतने रुपए देकर वो वैष्णो देवी में भंडारा कराएंगे। गुलशन कुमार की मौत के बाद उनके बेटे भूषण कुमार ने टी-सीरिज की जिम्मेदारी संभाली। 

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कभी पिता के साथ जूस बेचते थे गुलशन कुमार
गुलशन कुमार के पिता चन्द्रभान दुआ दिल्ली के दरियागंज में जूस बेचते थे। गुलशन कुमार भी जूस की दुकान पर अपने पिता का हाथ बंटाते थे और यहीं से बिजनेस में उनका इंटरेस्ट जगा।

ऐसे खड़ी की करोड़ों की कंपनी
- गुलशन कुमार जब 23 साल के थे तब उन्होंने फैमिली की मदद से एक दुकान को टेकओवर किया और रिकार्ड्स और ऑडियो कैसेट बेचना शुरू किया।
- यहीं से आगे चलकर उन्होंने नोएडा में अपनी कंपनी खोली और म्यूजिक इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन गए।
- गुलशन कुमार ने अपने ऑडियो कैसेट के बिजनेस को 'सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड' का नाम दिया, जिसे टी-सीरीज के नाम से जाना जाता है।
- गुलशन कुमार ऑरिजिनल गानों को दूसरी आवाजों में रिकॉर्ड कर कम दामों में कैसेट बेचा करते थे।
- जहां अन्य कंपनियों की कैसेट 28 रुपए में मिलती थी, गुलशन कुमार उसे 15 से 18 रुपए में बेचा करते थे।
- इस दौरान उन्होंने भक्ति गानों को भी रिकॉर्ड करना शुरू किया और वो खुद भी ये गाने गाया करते थे।
- 70 के दशक में गुलशन कुमार के कैसेट्स की डिमांड बढ़ती गई और वो म्यूजिक इंडस्ट्री के सफल बिजनेसमैन में शुमार हो गए।
- ऑडियो कैसेट्स में सफलता के बाद गुलशन कुमार ने फिल्म इंडस्ट्री की ओर कदम रखा और मुंबई चले आए।
- इसके बाद वे म्यूजिक और बॉलीवुड फिल्मों के अलावा हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित फिल्मों और सीरियल्स को भी प्रोड्यूस करने लगे।

गुलशन कुमार के नाम पर वैष्णो देवी में भंडारा...
फिल्म इंडस्ट्री में सफल होने के बाद गुलशन कुमार ने अपनी कमाई का एक हिस्सा सोशल काम में खर्च किया। धर्म में उनकी काफी रूचि थी और वे वैष्णो देवी के भक्त थे। उन्होंने वैष्णो देवी आने वाले भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन शुरू कराया था, जो आज भी चलता है। भंडारा श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले भक्तों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराता है।