AMMA controversy: मलयालम एक्टर एसोसिएशन 'अम्मा' में विवाद जारी है। 2 और सदस्यों के इस्तीफे के बाद प्रेसिडेंट श्वेता मेनन ने अपनी कमेटी को वैध बताया है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार, नए चुनाव तक उनकी कमेटी ही काम करेगी और एड-हॉक कमेटी अवैध है।

कोच्चि: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर्स एसोसिएशन 'अम्मा' (AMMA) में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक्टर जयन चेरत्तला और कैलाश ने भी संगठन से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने संगठन को ईमेल भेजकर अपना इस्तीफा सौंपा। जयन चेरत्तला ने साफ कहा कि उन्होंने 500 से ज्यादा सदस्यों के सामने सालाना आम बैठक में ही कमेटी के इस्तीफे का ऐलान कर दिया था और अब वे आगे पद पर बने नहीं रहना चाहते। ये दोनों उसी गवर्निंग बॉडी का हिस्सा थे, जिसने इस्तीफे की घोषणा की थी।

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यह कदम तब आया जब एड-हॉक कमेटी के सदस्य रमेश पिशारडी और गणेश कुमार ने आरोप लगाया था कि श्वेता मेनन समेत कई लोगों ने अब तक इस्तीफा नहीं दिया है। इन आरोपों के बाद प्रेसिडेंट श्वेता मेनन ने भी मोर्चा खोल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर जवाब दिया। श्वेता का कहना है कि 'अम्मा' के नियमों (बाय-लॉ) के मुताबिक, इस्तीफा देने वाली कमेटी को ही अगले चुनाव तक कामकाज देखना होता है। इसलिए, बनाई गई एड-हॉक कमेटी की कोई कानूनी वैधता नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ 'निहित स्वार्थ वाले लोग' संगठन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं।

श्वेता मेनन की पूरी पोस्ट

"मैं इतने दिन 'अम्मा' के लिए चुप थी। मुझे लगा कि मेरी चुप्पी से संगठन से जुड़ा विवाद खत्म हो जाएगा। लेकिन लगातार मेरे नाम को निशाना बनाया जा रहा है और मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। अब मैं अपनी बेगुनाही साबित किए बिना पीछे नहीं हटूंगी। आज उन्होंने कहा कि मैंने लोगों को धोखा दिया और 'अम्मा' को अनाथ कर दिया। नहीं। मैंने किसी को धोखा नहीं दिया है, न ही 'अम्मा' को अनाथ किया है। 21 जून को हुई सालाना आम बैठक (AGM) में, कुछ लोग पहले से तैयार एजेंडे के साथ आए थे कि हमारी कमेटी को इस्तीफा देना होगा। साफ कहूं तो ये 10-15 लोग थे। उन्होंने एक पहले से छपा हुआ प्रस्ताव बांटा, जिसमें कई आरोप थे। इसमें एग्जीक्यूटिव कमेटी के खिलाफ कई बेबुनियाद आरोप थे, जिनके हमारे पास साफ, तथ्यात्मक और कानूनी जवाब थे। वह प्रस्ताव मुझे सौंपा गया, लेकिन 'अम्मा' के बाय-लॉ के आर्टिकल 12 (e) के तहत वह पास नहीं हुआ। उस दिन मौजूद 243 सदस्यों में से प्रस्ताव के पक्ष में जरूरी दो-तिहाई बहुमत यानी 162 वोट नहीं मिले। इसलिए उस प्रस्ताव का कोई कानूनी आधार नहीं है।

आज उन्होंने कहा कि एड-हॉक कमेटी जनरल बॉडी का फैसला है। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि 'अम्मा' के बाय-लॉ में 'एड-हॉक कमेटी' जैसी कोई व्यवस्था कहां है? जो कमेटी बाय-लॉ में है ही नहीं, वह कैसे बन गई? बाय-लॉ साफ कहता है कि अगर कोई कमेटी आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देती है, तो नई कमेटी के चुनाव होने तक पुरानी चुनी हुई कमेटी ही काम करती रहेगी। जब लाल सर (मोहनलाल) की कमेटी ने इस्तीफा दिया था, तब यही नियम अपनाया गया था। तो फिर हमारी कमेटी के साथ यह नाइंसाफी क्यों हो रही है? कुछ निहित स्वार्थों के चलते हमारे लिए अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं?

'अम्मा' के बाय-लॉ के मुताबिक, सिर्फ एक ही कमेटी हो सकती है, और वह हमारी कमेटी है। जनरल बॉडी के फैसले के अनुसार, नई कमेटी के लिए अगला चुनाव होने तक यही कमेटी काम करेगी। इसलिए, जो लोग खुद को एड-हॉक कमेटी का बता रहे हैं, उनकी कोई कानूनी वैधता नहीं है। वे 'अम्मा' के सदस्यों को गुमराह कर रहे हैं। 'अम्मा' एक चैरिटी संगठन है। इससे बहुत से लोगों को मदद मिलती है। AGM के बाद से आज तक 'अम्मा' के किसी भी काम में कोई रुकावट नहीं आई है। 1 जुलाई को दिया जाने वाला 'कैनीट्टम' (एक तरह की आर्थिक मदद) हमने सदस्यों तक समय पर पहुंचाया है, संजीवनी, मेडिकल इंश्योरेंस… ये सब हम ठीक से कर रहे हैं। मेरी चुप्पी का फायदा उठाकर, 'अम्मा' के सदस्यों को गुमराह करके, कुछ आरोपी और निहित स्वार्थ वाले लोग 'अम्मा' को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए मैं किसी को भी 'अम्मा' को हाईजैक नहीं करने दूंगी।

आपकी अपनी,
श्वेता मेनन,
प्रेसिडेंट, 'अम्मा'।"