यश की फिल्म 'टॉक्सिक' 1947-1961 के गोवा में सेट एक बाप-बेटे की बदले की कहानी है। यह एक गैंगस्टर ड्रामा है, जिसे 'बड़ों के लिए परीकथा' कहा गया है। इसका मतलब परिपक्व दर्शक हैं, न कि कोई एडल्ट कंटेंट।

कन्नड़ इंडस्ट्री से निकलकर ग्लोबल स्टार बन चुके रॉकिंग स्टार यश (Rocking Star Yash) की अगली फिल्म 'टॉक्सिक' (Toxic) का पूरे देश को बेसब्री से इंतजार है। हाल ही में यश ने लॉस एंजेलिस में अपनी फिल्म 'रामायण' के प्रमोशन के बीच अपनी आने वाली फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' की नौ मिनट की एक खास झलक दिखाई। इस दौरान यश ने फिल्म की कहानी और इसकी खासियत से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें भी शेयर कीं।

'टॉक्सिक' की कहानी क्या है? यश ने क्या बताया?

यश के मुताबिक, 'टॉक्सिक' कोई साधारण मास मसाला फिल्म नहीं है। उन्होंने बताया, "यह फिल्म 'रामायण' से बिल्कुल अलग है, जिसमें मैं काम कर रहा हूं। यह एक 'वाइल्ड' फिल्म है और इसे बड़ों के लिए बनाई गई एक परीकथा समझिए। सीधे-सीधे कहूं तो यह एक बाप-बेटे के बीच बदले की कहानी (Father-Son Revenge Saga) है।"

फिल्म की सबसे खास बात इसका टाइम पीरियड है, जो 1947 से 1961 के बीच सेट है। यह वो दौर था जब भारत तो आजाद हो गया था, लेकिन गोवा पर अभी भी पुर्तगालियों का शासन था। यश ने बताया कि यह एक फिक्शनल गैंगस्टर फिल्म होगी, जिसने फैंस का एक्साइटमेंट और बढ़ा दिया है।

अनुराग कश्यप ने समझाया: 'एडल्ट' का मतलब सिर्फ अश्लीलता नहीं!

वहीं, बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने फिल्म के टाइटल को लेकर चल रही गलतफहमियों को दूर किया है। फिल्म का सब-टाइटल है 'ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' (बड़ों के लिए एक परीकथा)। इसे लेकर लोग सोच रहे थे कि शायद इसमें एडल्ट या सेक्शुअल कंटेंट होगा। लेकिन कश्यप ने साफ किया, "यहां 'ग्रोन-अप्स' का मतलब समझदार और मैच्योर सोच वाले लोगों से है। यह फिल्म सिर्फ सेक्स के बारे में नहीं है। हमारा समाज और सिनेमा अब तक पुरुष और महिला किरदारों को जिस तरह से देखता आया है, यह फिल्म उन पैमानों को बदलने वाली है। डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने इस फिल्म के जरिए कुछ नया कर दिखाया है।"

टीज़र विवाद और कश्यप का जवाब

कुछ समय पहले जब 'टॉक्सिक' का टीज़र आया था, तो समाज के कुछ वर्गों ने इसका विरोध किया था। यहां तक कि महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस पर बात करते हुए कश्यप ने कहा, "हमारे समाज में दोहरापन है। जब कोई हीरो शर्ट उतारकर मास अंदाज में दिखता है, तो कोई सवाल नहीं करता। लेकिन जब कोई महिला किरदार पावरफुल या अपने तरीके से नजर आती है, तो लोग विरोध करने लगते हैं। 'टॉक्सिक' एक बहुत সাহসী कोशिश है।"

गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बन रही इस पैन-इंडिया फिल्म को KVN प्रोडक्शंस बना रहा है। यह फिल्म 4 जून को दुनिया भर में रिलीज होने के लिए तैयार है। अब देखना यह है कि यश का यह नया अवतार पर्दे पर क्या कमाल दिखाता है।