बिहार में होने वाले चुनाव के बीच मुकेश सहनी का नाम खूब सुर्खियों में है। वे भले ही एक छोटी पार्टी का नेतृत्व करते हों, लेकिन महागठबंधन द्वारा उप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए जाने के बाद वे और लाइमलाइट में आ गए हैं। उनका फिल्मों से भी नाता रहा है। 

मुकेश सहनी एक छोटी पार्टी का नेतृत्व कर रहे है, लेकिन जब से महागठबंधन द्वारा उन्हें उप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है, उनकी चर्चा और ज्यादा होने लगी है। बिहार के हाशिए पर पड़े मतदाताओं पर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) का प्रभाव उन्हें गठबंधन में एक मजबूत नेता बनाता नजर आ रहा है। बता दें कि उन्हें सन ऑफ मल्लाह के नाम से भी पहचाना जाता है। वैसे, आपको बता दें कि मुकेश राजनेता तो है ही साथ ही वे मनोरंजन जगत से भी जुड़े हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में अपनी अदाकारी भी दिखाई है। वे कुछ बड़े स्टार्स के साथ भी स्क्रीन शेयर कर चुके हैं।

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कौन है वीआईपी नेता मुकेश सहनी

1981 में दरभंगा के एक मछुआरे परिवार में जन्मे मुकेश सहनी ने अपना निक नेम 'सन ऑफ मल्लाह' अपनाया। ये उनके नाविकों और मछुआरों के समुदाय के लिए एक सम्मान था। 19 साल की उम्र में उन्होंने बिहार छोड़ दिया और मुंबई आकर सेल्समैन का काम करने लगे थे। फिर उन्होंने बॉलीवुड में किस्मत आजमाई और फिल्मों के लिए सेट डिजाइनर के रूप में काम करना शुरू किया। उन्हें एक्टिंग का भी शौक था तो काफी मशक्कत के बाद उन्हें कुछ फिल्मों में काम करने मौका मिला। उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म देवदास और सलमान खान की बजरंगी भाईजान में काम किया। इन फिल्मों में काम कर उन्हें पहचान मिली। फिर उन्होंने मुंबई में मुकेश सिने वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी भी खोली। हालांकि, 2013 में बीआर अंबेडकर और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों से प्रेरित होकर वे पिछड़े वर्गों (ईबीसी) के लिए लड़ने के लिए बिहार लौट आए।

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मुकेश सहनी ने बनाई विकासशील इंसान पार्टी

2018 में मुकेश सहनी ने निषाद-मल्लाह अधिकारों की वकालत करने के लिए विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) की स्थापना की। दोनों मिलकर बिहार के मतदाताओं का लगभग 12% हिस्सा हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में केवल चार सीटें जीतने के बावजूद, जो बाद में भाजपा के पाला बदलने के कारण हार गईं थी, सहनी ने खुद की पहचान बनाई। 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान वे एनडीए के साथ थे, लेकिन बाद में विधायकों पर भाजपा के प्रभाव को लेकर मतभेद होने के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी।

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