शोभिनव सत्य स्टारर और डॉ. विशाल चतुर्वेदी निर्देशित ‘हनुमान अंश’ का ‘पार्वती’ भजन सोशल मीडिया पर छाया है। बुंदेली बोलों में शिव-पार्वती की कहानी और अनोखे शब्दों का मतलब जानिए।
डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 122 करोड़ रुपए से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर चुकी है। तकरीबन 1.8 करोड़ रुपए बनी इस फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के बारे में हैं, जो दर्शकों को आकर्षित कर रही है। लेकिन सिर्फ कहानी ही नहीं, इसके गाने भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहे हैं। खासकर ‘पार्वती’ सॉन्ग इतना पॉपुलर हो चुका है कि लोग इसे बार-बार देख रहे हैं और इस पर रील्स बनाकर शेयर कर रहे हैं। लेकिन इस गाने के बोल क्या है और इसमें आए शब्दों का अर्थ क्या है? चलिए आपको बताते हैं सबकुछ…
‘पार्वती’ गाने के बोल (लिरिक्स)
मुखड़ा
शंभू, शिव शंभू... भोलेनाथ!
जब ज़िद पे आ गई पार्वती… पार्वती… पार्वती
समझाने पहुंचे सप्तऋषि… सप्तऋषि… सप्तऋषि
काय ज़िद कर रईं… काय खों मर रईं....
काय ज़िद कर रईं… काय खों मर रईं! ऐसे वर के लाने…
जाके सीस पे गंगा और गले में डारे फिर रए सांप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
अंतरा-1
न खपरा न छपरा, न फूस की धरें मड़ैया
का खावे खों धरो वहां, बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरें अवधूत फिरें, अब तुमसे का कएं बिन्नू
डोरा डंगर ले घूमें वे विनके कछुअई नइयां विनके कछुअई नइयां...
काय ज़िद कर रईं… काय तप कर रईं...
काय ज़िद कर रईं… काय खों मर रईं! ऐसे वर के लाने…हां ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में डारे फिर रए सांप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ...भोलेनाथ
अंतरा -2
जटा -लटा न कबहुं संवारें, दीसत महा भयंकर।
मूड़ पे आधो चंदा और बैला पे घूमें शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे, और उन्हें का चानें
कामदेव के मर्दनहारी, घर-गृहस्थी क्या जानें...वे घर-गृहस्थी क्या जानें...
काय ज़िद कर रईं… काय खों मर रईं!
काय ज़िद कर रईं… काय तप कर रईं! ऐसे वर के लाने… बिन्नू! ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में डारे फिर रए सांप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ...भोलेनाथ
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'पार्वती' भजन में इस्तेमाल हुए शब्दों का अर्थ
| बुंदेली शब्द | अर्थ |
| काय | क्यों |
| रईं | रहीं |
| खों | के लिए |
| के लाने | के लिए |
| जाके | जिसके |
| डारे | डाले |
| फिर रए | घूम रहे |
| खपरा | कवेलू |
| छपरा | छप्पर/झोपड़ी |
| धरें | रखें |
| फूस | सूखी हुई घास |
| मड़ैया | छोटी झोपड़ी |
| खावे खों | खाने के लिए |
| रोवत रहत | रोते रहते |
| लड़इया | गीदड़/सियार |
| भेष धरें अवधूत | संन्यासी का रूप लिए |
| कएं | कहें |
| बिन्नू | बहन |
| डोरा-डंगर | ढोर-डंगर/ पशुधन/ गाय-बैल |
| विनके | उनके पास |
| कछुअई नइयां | कुछ भी नहीं है |
| कबहुं | कभी भी |
| दीसत | दिखाई देते हैं |
| मूड़ | सिर/माथा/ललाट |
| आधो | आधा |
| बैला | बैल/नंदी |
| का चानें | क्या चाहिए |
| मर्दनहारी | नष्ट करने वाले |

‘पार्वती’ गाने का आशय क्या है?
दरअसल, ‘पार्वती’ एक बुंदेली भजन है, जो उस सिचुएशन को बताता है, जब माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की जिद कर बैठती हैं और उनके लिए तपस्या करने लगती हैं। तब सप्तऋषि उन्हें समझाने पहुंचते हैं और भगवान शिव के रूप और व्यवहार का चित्रण उनके सामने करते हैं।
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‘पार्वती’ गाने के क्रेडिट्स
फिल्म : 'हनुमान अंश'
भजन टाइटल : पार्वती
गीतकार और गायक : साधू एस. तिवारी
कंपोजर : साधू एस. तिवारी और समीरन दास
