'रामायणम्' के ट्रेलर में कॉस्ट्यूम और जूलरी पर उठे सवालों के बीच रामानंद सागर की 'रामायण' फिर चर्चा में है। जानिए कैसे बेहद कम बजट में बना था इस शो का आइकॉनिक लुक?
नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म 'रामायणम्' का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी हर छोटी-बड़ी डिटेल चर्चा का विषय बन गई। वीएफएक्स, कास्टिंग और विजुअल्स की तारीफ के साथ-साथ कॉस्ट्यूम और जूलरी को लेकर भी कई सवाल उठे। कई यूजर्स ने कैकेयी, सीता और शूर्पणखा के लुक को जरूरत से ज्यादा मॉडर्न बताते हुए इसकी तुलना रामानंद सागर की क्लासिक 'रामायण' से शुरू कर दी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 1987 की 'रामायण' में इतने सीमित बजट के बावजूद किरदारों के कॉस्ट्यूम और आभूषण कैसे तैयार किए गए थे?
रामानंद सागर की 'रामायण' इतने कम बजट में कैसे बनी?
रामानंद सागर ने सीमित संसाधनों और कई रचनात्मक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पॉपुलर टीवी सीरीज 'रामायण' बनाई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, 78 एपिसोड वाले इस शो का कुल बजट करीब 7 से 9 करोड़ रुपये था और एक एपिसोड पर लगभग 9 लाख रुपये खर्च हुए थे। इसके मुकाबले 'रामायणम्' का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिसमें हाई-एंड वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया है।
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'रामायण' के कॉस्ट्यूम किस कंपनी ने तैयार किए थे?
रामानंद सागर ने कॉस्ट्यूम डिजाइन पर खुद विशेष ध्यान दिया था। शो में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और अन्य सभी प्रमुख किरदारों के परिधान 'मगनलाल ड्रेसवाला' ने तैयार किए थे। यह भारत की सबसे पुरानी कॉस्ट्यूम सप्लायर कंपनियों में गिनी जाती है और लगभग 100 साल पुरानी विरासत रखती है। इस कंपनी का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। बताया जाता है कि इसी कंपनी ने भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' के कॉस्ट्यूम तैयार किए थे। इसके अलावा महाभारत, मुगल-ए-आजम, रोटी कपड़ा और मकान, ज्वेल थीफ, चाणक्य, कोहिनूर और ताजमहल जैसी कई चर्चित फिल्मों और टीवी शोज के लिए भी परिधान डिजाइन किए गए।
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रामायण की जूलरी कैसे तैयार की गई थी?
'रामायण' के सेट और आभूषणों की डिजाइनिंग मशहूर आर्ट डायरेक्टर हीराभाई पटेल ने की थी। जानकारी के अनुसार, हर किरदार की जूलरी बनाने से पहले वह उसका स्केच हाथ से तैयार करते थे और रामानंद सागर के साथ उस पर चर्चा करते थे। डिजाइन मंजूर होने के बाद ही वास्तविक जूलरी तैयार की जाती थी। यही वजह है कि आज भी उस शो के लुक को इंडियन टेलीविजन ही नहीं, पूरे इंडियन सिनेमा के लिए एक बेंचमार्क माना जाता है।
