गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यश राज फिल्म्स ने रानी मुखर्जी और क्रिकेटर दीप्ति शर्मा के साथ एक प्रेरणादायक वीडियो रिलीज़ किया है। यह वीडियो उपलब्धियों पर जेंडर लेबल लगाने की सोच को चुनौती देता है और समानता व योग्यता का मजबूत संदेश देता है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यश राज फिल्म्स (YRF) ने एक प्रभावशाली और सोच को झकझोर देने वाला वीडियो रिलीज़ किया है। इस वीडियो में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री रानी मुखर्जी और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंडर व यूपी वॉरियर्ज़ की स्टार खिलाड़ी दीप्ति शर्मा नज़र आती हैं।

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यह वीडियो उपलब्धियों को जेंडर के चश्मे से देखने की मानसिकता पर सवाल उठाता है और समानता व योग्यता का सशक्त संदेश देता है।

उपलब्धियों पर जेंडर लेबल लगाने पर सवाल

वीडियो में रानी मुखर्जी और दीप्ति शर्मा के बीच एक सहज, ईमानदार और बेबाक बातचीत दिखाई गई है। इस बातचीत के ज़रिए यह सवाल उठाया गया है कि- जब शेफ, पायलट या डॉक्टर जैसे पेशों को महिला या पुरुष कहकर नहीं देखा जाता, तो फिर किसी की उपलब्धि को “महिला उपलब्धि” या “पुरुष उपलब्धि” क्यों कहा जाए?

यह सवाल समाज में गहराई से जमी उस सोच को चुनौती देता है, जहां सफलता को अब भी जेंडर से जोड़कर देखा जाता है।

समानता का संदेश, कैमरे के पीछे भी

इस वीडियो की एक खास बात यह भी है कि इसे बनाने वाली पूरी क्रिएटिव और प्रोडक्शन टीम महिलाएं हैं। कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी महिलाओं की भागीदारी इस संदेश को और मजबूत करती है कि काबिलियत का कोई जेंडर नहीं होता 🎥💪

“अचीवमेंट्स का कोई जेंडर नहीं होता”

वीडियो का केंद्रीय संदेश बेहद साफ और प्रभावशाली है- “अचीवमेंट्स का कोई जेंडर नहीं होता। इस रिपब्लिक डे, लेबल्स को जाने दें।” यह लाइन न सिर्फ प्रेरित करती है, बल्कि समाज को आत्ममंथन के लिए भी मजबूर करती है।

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गणतंत्र दिवस पर आत्ममंथन की अपील

यह वीडियो सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है। गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची समानता तब आएगी, जब हम उपलब्धियों को व्यक्ति की मेहनत और योग्यता से पहचानेंगे, ना कि उसके जेंडर से।