एक्टर रोहित रॉय ने टीवी को 'डस्टबिन मीडियम' बताते हुए एक नई बहस छेड़ दी है। उनके इस बयान की टीवी जगत में आलोचना हो रही है।
टीवी और बॉलीवुड के बीच लंबे समय से तुलना होती रही है, लेकिन एक्टर रोहित रॉय के हालिया बयान ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। 90 के दशक में टीवी शो ‘स्वाभिमान’ से पहचान बनाने वाले रोहित रॉय ने एक इंटरव्यू में टेलीविजन इंडस्ट्री को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ तक कह दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने टीवी एक्टर्स और फिल्म स्टार्स के बीच भी फर्क बताया और कहा कि फिल्म स्टार्स में एक अलग तरह का स्टाइल, क्लास और ग्रेस नजर आता है।
टीवी को लेकर रोहित रॉय ने क्या कहा?
रोहित रॉय से इंटरव्यू के दौरान पूछा गया कि आखिर टीवी एक्टर्स की पॉपुलैरिटी को अक्सर फिल्म एक्टर्स से कम क्यों माना जाता है और क्या दोनों इंडस्ट्री के बीच कोई अंतर है। इस पर रोहित ने कहा कि उनके हिसाब से फिल्म एक्टर्स में एक खास तरह का ‘क्लास’ और ‘ग्रेस’ होता है, जो उन्हें टीवी एक्टर्स से अलग बनाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई बड़ा फिल्म स्टार किसी पब्लिक इवेंट में पहुंचता है तो उसके आने का अंदाज, बॉडी लैंग्वेज और लोगों के बीच उसका प्रेजेंस अलग दिखाई देता है। उनके मुताबिक हर इंसान एक तरह का ‘मास्क’ पहनता है, यानी पब्लिक के सामने अपनी एक इमेज बनाकर रखता है। लेकिन फिल्म स्टार्स का यह ‘मास्क’ उन्हें ज्यादा ग्रेसफुल, स्टाइलिश और कूल नजर आता है।
और पढ़ें - काजोल को सता रही 16 साल के बेटे युग की चिंता, जानें मां का सबसे बड़ा डर
'टीवी एक्टर्स में वो कैरेज नहीं है'
रोहित रॉय ने टीवी एक्टर्स के बारे में बात करते हुए कहा कि उनमें फिल्म स्टार्स जैसा कैरेज और प्रेजेंस नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि अगर आप किसी ऐसे इवेंट को देखें जहां कई टीवी एक्टर्स एक साथ मौजूद हों, तो उनके व्यवहार और बातचीत के तरीके से आपको खुद इस सवाल का जवाब मिल जाएगा। रोहित ने यह भी कहा कि वह खुद टीवी से आए हैं और इसलिए उन्हें इस बात की जानकारी है कि एक्टर को पब्लिक के सामने किस तरह पेश आना चाहिए। उनके मुताबिक किसी कलाकार के व्यवहार और उसके पब्लिक प्रेजेंस में एक खास अंदाज होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी टीवी एक्टर्स को लेकर कही बड़ी बात
रोहित रॉय ने टीवी एक्टर्स की सोशल मीडिया प्रेजेंस को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ तरह की पोस्ट ऑडियंस को थ्रिल तो दे सकती हैं, लेकिन इससे जरूरी नहीं कि लोग कलाकार की इज्जत भी करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक कलाकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह पब्लिक के सामने खुद को किस तरह पेश करता है। रोहित के मुताबिक टीवी के बहुत कम एक्टर्स ऐसे हैं जो यह समझते हैं कि अपने ऑडियंस से किस तरह बात करनी चाहिए।
'सिनेमा हमेशा याद रहने के लिए होता है'
रोहित रॉय ने फिल्म और टीवी के बीच अंतर बताते हुए सिनेमा को ज्यादा ऊंचा माध्यम बताया। उनका कहना था कि सिनेमा लंबे समय तक याद रहने के लिए बनाया जाता है, जबकि टीवी का कंटेंट अक्सर उस तरह की स्थायी छाप नहीं छोड़ता। इसी बात को समझाते हुए उन्होंने टेलीविजन को ‘डस्टबिन मीडियम’ तक कह दिया। उनके इस बयान ने टीवी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच बहस छेड़ दी है।
और पढ़ें - गौरव खन्ना ने दिए 10 करोड़? आकांक्षा चमोला ने तलाक एलिमनी पर दिया बड़ा बयान
खुद टीवी से मिली रोहित रॉय को पहचान
रोहित रॉय के बयान को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उनके करियर की शुरुआत और पहचान टीवी से ही हुई थी। वह 1990 के दशक के पॉपुलर शो ‘स्वाभिमान’ का हिस्सा रहे हैं, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद रोहित ने फिल्मों में भी काम किया और ‘कांटे’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘फैशन’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘काबिल’, ‘पलटन’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों में नजर आए। यानी उनका करियर टीवी और बॉलीवुड, दोनों माध्यमों से जुड़ा रहा है।
बयान के बाद शुरू हुई बहस
रोहित रॉय के इस बयान के सामने आने के बाद टीवी इंडस्ट्री में इसे लेकर प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने रोहित के बयान की आलोचना की और टीवी इंडस्ट्री की अहमियत पर सवाल उठाने को लेकर उन्हें जवाब दिया। वहीं एक्टर नमन शॉ ने भी रोहित के ‘डस्टबिन मीडियम’ वाले कमेंट पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अब यह बयान सिर्फ रोहित रॉय की निजी राय तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि टीवी बनाम बॉलीवुड की पुरानी बहस को भी फिर से सामने ले आया है। एक तरफ रोहित टीवी के मौजूदा काम करने के तरीके और कलाकारों के पब्लिक प्रेजेंस पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टीवी से जुड़े कलाकार इस माध्यम के योगदान और अपनी इंडस्ट्री के सम्मान का बचाव कर रहे हैं।
