S Janaki Tribute: दिग्गज सिंगर एस जानकी का मैसूर में निधन हो गया। उनके जाने से सीएम विजय, रजनीकांत और कमल हासन समेत पूरा साउथ सिनेमा भावुक है। जानें किसने क्या कहा..
S Janaki Death: भारतीय संगीत जगत को बड़ा झटका लगा है। अपनी जादुई और मीठी आवाज से कई पीढ़ियों और करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज प्लेबैक सिंगर एस जानकी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 88 साल की उम्र में उन्होंने शनिवार को मैसूर में अंतिम सांस ली। प्यार से लोग उन्हें 'जानकी अम्मा' और 'साउथ की नाइटिंगेल' (Nightingale of South India) कहकर बुलाते थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। सिनेमा से लेकर राजनीति जगत की बड़ी हस्तियां बेहद भावुक हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन समेत कई दिग्गजों ने नम आंखों से जानकी अम्मा को श्रद्धांजलि दी है।
जानकी अम्मा के निधन पर सीएम विजय का इमोशनल मैसेज
जानकी अम्मा के निधन पर तमिलनाडु के CM विजय (Jana Nayagan) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बेहद इमोशनल संदेश शेयर किया। उन्होंने लिखा, 'भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अनोखी आवाज से कई पीढ़ियों का दिल जीतने वाली एस जानकी का जाना गहरा दुख दे गया है। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और फैंस के साथ हैं।'
रजनीकांत ने दी भावुक श्रद्धांजलि
जानकी अम्मा के निधन पर थलाइवा ने शोक जताते हुए लिखा, 'अपनी शहद जैसी मीठी आवाज से कई पीढ़ियों को खुश करने वाली महान आत्मा को शांति मिले।'
कमल हासन भी हुए इमोशनल
जानकी अम्मा के जाने पर बेहद भावुक होते हुए दिग्गज अभिनेता कमल हासन ने लिखा, 'गीत हमेशा गूंजता रहेगा। मैं उस प्यार को अब कहां ढूंढूंगा, मां? कई लोगों के लिए यह कभी न भूलने वाला दुख है। मेरी गहरी संवेदनाएं।'
बिना किसी ट्रेनिंग के 9 साल की उम्र में पहली परफॉर्मेंस
23 अप्रैल 1938 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले (पल्लापतला) में जन्मीं जानकी के पिता सिस्तला श्रीराममूर्ति एक आयुर्वेदिक डॉक्टर और टीचर थे। उनका बचपन सिरसिला में बीता। जानकी अम्मा ने क्लासिकल म्यूजिक की कोई औपचारिक (फॉर्मल) पढ़ाई नहीं की थी। उन्होंने नादस्वरम के उस्ताद पाइदीस्वामी से संगीत की सिर्फ बेसिक बातें सीखी थीं। इसके बावजूद, महज 9 साल की उम्र में उन्होंने स्टेज पर अपनी पहली परफॉर्मेंस दे दी थी। साल 1959 में उन्होंने वी रामप्रसाद से शादी की, जिन्होंने उनके करियर में साए की तरह उनका साथ दिया। साल 1997 में दिल का दौरा पड़ने से रामप्रसाद जी का निधन हो गया था।
60 साल का करियर, 6 भाषाओं से शुरुआत और हजारों गाने
भले ही जानकी अम्मा की मातृभाषा तेलुगु थी, लेकिन वह तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी समेत कई भाषाएं बहुत आसानी से बोल और लिख लेती थीं। उन्होंने 1957 में महज 19 साल की उम्र में तमिल फिल्म 'विंध्यिन विलायट्टू' से अपने करियर की शुरुआत की। कमाल की बात यह है कि अपने पहले ही साल में उन्होंने 6 अलग-अलग भाषाओं में गाने गाए। लगभग 60 साल तक संगीत की दुनिया पर राज करने के बाद उन्होंने 2016 में संन्यास का ऐलान किया। हालांकि, अपने फैंस के प्यार के लिए वह 2018 में एक बार फिर तमिल फिल्म 'पन्नाडी' के लिए माइक के सामने आईं और अपना आखिरी गाना रिकॉर्ड किया। अपनी बेमिसाल गायकी के लिए उन्होंने 4 नेशनल फिल्म अवॉर्ड और अलग-अलग राज्यों से 33 स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स जीते।
जब ठुकरा दिया था देश का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान 'पद्म भूषण'
जानकी अम्मा न सिर्फ अपनी बेहतरीन गायकी, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए भी जानी जाती थीं। साल 2013 में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया था जिसने पूरे देश को चौंका दिया। सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' (Padma Bhushan) के लिए चुना था, लेकिन उन्होंने इसे लेने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि भारतीय संगीत में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें बहुत पहले ही देश का सबसे बड़ा सम्मान यानी 'भारत रत्न' (Bharat Ratna) मिल जाना चाहिए था। यह सम्मान मिलने में बहुत देर की गई।


