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Tulsi Vivah 2022: ग्यारस पर माता तुलसी और भगवान शालिग्राम को जरूर लगाया जाता है इन चीजों को भोग

इस बार तुलसी विवाह यानी कि देवउठनी ग्यारस का त्योहार 4 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम भगवान के विवाह करवाने की परंपरा है। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि इस दौरान आपको इन्हें भोग स्वरूप क्या चढ़ाना चाहिए।
 

Dev uthani gyaras 2022: what to serve to Tulsi Mata and lord shaligram on Tulsi Vivah dva
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First Published Nov 3, 2022, 7:40 AM IST

फूड डेस्क : हर साल कार्तिक मास की एकादशी पर देवउठनी ग्यारस (Devuthni gyaras 2022) का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह दिन 4 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। कहते है कि इस दिन विष्णु भगवान नींद से उठे थे, इसलिए इस दिन को देवउठनी ग्यारस भी कहा जाता है। आज के दिन तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) कराने की भी परंपरा है। इसी दिन से हिंदू धर्म में शादी विवाह जैसी शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। तुलसी विवाह के दौरान तुलसी माता और भगवान शालिग्राम को विभिन्न प्रकार के भोग चढ़ाने का भी महत्व होता है। आइए हम आपको बताते हैं कि उन्हें भोग स्वरूप (Prasad for Tulsi Vivah) किन चीजों को अर्पित करना चाहिए...

भगवान को चढ़ाए मौसमी सब्जियां और फल
अगर आप घर में तुलसी विवाह कर रहे हैं, तो पूजा अर्चना के दौरान माता तुलसी और भगवान शालिग्राम को गन्ना, आंवला, मूली, बेल, शकरकंद, सीताफल, सिंघाड़ा आदि चीजों का भोग जरूर लगाया जाता है। ये सभी मौसमी फल और सब्जियां होती हैं। तुलसी विवाह के दौरान इन चीजों का भोग लगाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और हम पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

पंचामृत है जरूरी
तुलसी विवाह के दौरान भगवान को अर्पित करने के लिए पंचामृत जरूर बनाया जाता है। लेकिन अक्सर लोग पंचामृत और चरणामृत में कंफ्यूज हो जाते हैं और ठीक ढंग से पंचामृत नहीं बना पाते हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आपको कैसे पंचामृत बनाना चाहिए। पंचामृत इन 5 सामग्रियों से बनता है: दूध, दही, चीनी, शहद और घी-
पंचामृत के लिए
1/2 कप दूध
2 टेबलस्पून ताजा दही
1/4 टीस्पून घी
1/2 टेबलस्पून चीनी (पीसी हुई)
1/2 टीस्पून शहद
गार्निश के लिए
तुलसी के पत्ते

विधि
पंचामृत के लिए सभी सामग्री को एक गहरे बाउल में डालें और अच्छी तरह मिलाएं। आप चाहे तो इसमें अपनी पसंद के ड्राई फ्रूट्स जैसे- काजू,बादाम, किशमिश, छुहारा या नारियल का बूरा भी डाल सकते हैं। अंत में पंचामृत को तुलसी के पत्तों से सजाकर भगवान को अर्पित करें।

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