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भारत के 100 साल पुराने 8 सबसे सफल कारोबारी घराने, लिस्ट में नहीं है अंबानी परिवार
मुंबई: भारत में बहुत सारी कंपनियों ने जन्म लिया है इनमे से बहुत सी कंपनियों ने काफी नाम कमाया है और बाजार में अब तक टिकी हुई हैं और कुछ कंपनियां कड़े कम्पटीशन के कारण खत्म भी हो गईं। इन कंपनियों में से कुछ ने भारत की आजादी से पहले ही बिजनेस शुरू कर दिया था और हर गुजरते दिन के साथ ये कंपनी पहले से और मजबूत होते जा रहे हैं। वे न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में नाम कमा चुके हैं। 100 साल पुरानी गोल्डन कंपनियों की इस लिस्ट में ऐसी कुछ कंपनी हैं जिन्होंने भारत और विदेशों में काफी नाम कमाया है।
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आज हम आपको उन 8 कंपनियों के बारे में बताना चाहते हैं जो 100 से अधिक सालों से कामयाबी से चल रही हैं। हालांकि इस लिस्ट में रिलायंस ग्रुप नहीं शामिल है क्योंकि उसकी स्थापना 1960 में हुई थी और उसके 100 साल पूरे नहीं हुए हैं।
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टाटा ग्रुप: टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में एक प्राइवेट ट्रेडिंग फर्म के रूप में किया था। 1902 में इस समूह ने इंडियन होटल्स कंपनी नाम की एक कंपनी बनाई जिसमें भारत के पहले लक्जरी होटल, ताज महल पैलेस एंड टॉवर को शामिल किया गया था, जिसे अगले वर्ष खोला गया। 1904 में जमशेदजी की मृत्यु के बाद, उनके बेटे सर दोराब टाटा ने टाटा ग्रुप की कुर्सी संभाली। उनके लीडरशिप में ग्रुप में तेजी से विविधता आई और इस ग्रुप में नई कंपनियों को शामिल किया गया जैसे- केमिकल (1939), टेक्नोलॉजी (1945), कास्मेटिक (1952), मार्केटिंग, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग (1954), चाय (1962), और सॉफ्टवेयर सर्विस (1968) जिससे टाटा ग्रुप को एक इंटरनेशनल पहचान मिली। रतन टाटा ने इस ग्रुप में कई और कंपनियों को शामिल किया जैसे टाइटन, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा टेलीसर्विसेज, तनिष्क, फास्टट्रैक, क्रोमा, टाटा साल्ट, टाटा स्टारबक्स, वोल्टास, टाटा स्काई, टाटा डोकोमो, टाटा स्टील जैसे कई ब्रांड्स ने मार्केट पर अपना दबदबा कायम कर दिया। इसके अलावा टाटा ग्रुप के रक्षा, बिजली , फाइनेंस, हेल्थ सर्विस, आईटी सर्विस और रियल एस्टेट में इनके एंटरप्राइज हैं।
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बिड़ला ग्रुप: सेठ शिव नारायण बिड़ला ने बिरला हाउस की नींव रखते हुए कपास (cotton) का व्यापार शुरू किया। आदित्य बिड़ला समूह की स्थापना 1960 के दशक में आदित्य बिड़ला ने की थी, जिन्होंने 24 साल की उम्र में अपना बिजनेस एम्पायर बनाना शुरू कर दिया था। तब तक, बिड़ला परिवार लगभग एक सदी तक भारत के सबसे प्रमुख बिजनेस घरानों में से एक रहा था। बिड़ला परिवार की बिज़नेस में शुरुआत 19 वीं शताब्दी में हुई जब 1870 में सेठ शिव नारायण बिड़ला ने राजस्थान के पिलानी शहर में कपास और जूट-व्यापार का व्यवसाय शुरू किया। ब्रिटिश व्यवसाय और ब्रिटिश कंपनियों द्वारा एकाधिकार के बावजूद सेठ शिव नारायण बिड़ला परिवार का भाग्य बनाने में सफल रहे।
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TVS ग्रुप: तमिल परिवार में जन्में थिरुवेंगुड़ी सुंदरम अयंगर ने भारतीय रेलवे और एक बैंक में वकील के रूप में काम किया था। 1911 में उन्होंने खुद की बस सेवा शुरू की और उसी साल TVS संस एंड लिमिटेड की शुरुआत हुई थी। टीवीएस गैस प्लांट, मद्रास ऑटो सर्विस लिमिटेड, सुंदरम मोटर्स ने उनके द्वारा शुरू किया गया था। ये पूरा बिजनेस एक साम्राज्य में बदल गया और अभी भी ये पूरी तरह परिवार द्वारा ही चलाया जा रहा है। टीवी सुंदरम के 8 बच्चे थे, सौन्दरम, राजम, डोराविस्वामी, संथानम, अमु अमाल, रंगा अम्मा, श्रीनिवासन, कृष्णा। दुरीसामी की मृत्यु जल्दी हो गई। उनके 4 बेटे बिजनेस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए और इस प्रकार कंपनी की चार मुख्य शाखाएँ हैं। उनकी बेटी टी एस सौन्दरम ने महात्मा गांधी के साथ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। यहां तक कि उनके नाम पर डाक टिकट भी है। उन्होंने टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों में और चेन्नई, मुंबई, कोयम्बटूर, स्पेन, यूके और ईरान जैसी जगहों पर कंपनियां शुरू की हैं।
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किर्लोस्कर ग्रुप: लक्ष्मणराव किर्लोस्कर द्वारा शुरू किया गया और उनके बेटे शांतनुराव लक्ष्मणराव किर्लोस्कर के लीडरशिप में कंपनी पंपों और वाल्वों की सबसे बड़ी उत्पादक बन गई। इसे लगभग 70 देशों में निर्यात करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा कंपनी ने तेल इंजन, मोटर्स, बिजली के उपकरण आदि के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एंटरप्राइज शुरू किया गया। टोयोटा किर्लोस्कर के पास भारतीय बाजार के लिए कारों का उत्पादन करने वाले का एक छोटा हिस्सा भी है। इस ग्रुप की ज्यादातर कंपनियां किर्लोस्कर परिवार और उनके रिश्तेदार भारत और विदेशों में संभाल रहे हैं।
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मुरुगप्पा: ए एम मुरुगप्पा चेट्टियार ने इस ग्रुप की शुरुआत ऋण उधार और बैंकिंग सेक्टर से शुरू की थी। उन्होंने आगे स्टील ट्यूब, इंश्योरेंस, साइकल, शुगर इत्यादि में अपनी फर्में बनाईं। इस कंपनी को मुर्गप्पा परिवार द्वारा संभाला जाता है। आज इस ग्रुप के पास कुल 28 उपक्रम है।
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गोदरेज: 19 वीं शताब्दी भारत में राजनीतिक उथल-पुथल का समय था। राष्ट्रवादी आंदोलन अपने चरम पर था और लोग ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त करने के संघर्ष में शामिल हो रहे थे। ऐसे में अर्देशिर बुर्जोरजी गोदरेज ने जो की पेशे से एक वकील थे उन्होंने एक मिशन के रूप में एक ऐसा उत्पाद विकसित किया जो विदेशी ब्रांडों को टक्कर दे सके और स्वदेशी मूवमेंट को बढ़ावा दे सके। इस ग्रुप की शुरुआत उन्होंने 1897 में ताले बनाने से किया। इसके बाद उन्होंने कई तरह का प्रयोग करने के बाद भारत में तिजोरियों और अलमारियों का प्रोडक्शन शुरू किया ये भारत में बनी पहली पूर्ण रूप से स्वदेशी अलमारी थी उनके तिजोरी की क्वालिटी इतनी जबरदस्त थी की 1905 में इंग्लैंड की महारानी ने गोदरेज से तिजोरियां खरीदी। अगले लगभग सौ सालों में कंपनी आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा के लिए काफी सारे उत्पाद बनाए। आज गोदरेज बैंकों के लिए भी उपकरण बनाती है जिसमें वाल्ट्स इत्यादी शामिल हैं इसके साथ-साथ गोदरेज समुद्री और रक्षा क्षेत्रों के लिए प्रवेश द्वार और उत्पाद भी बना रहा है।
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एसपी ( शापूरजी पलोनजी) समूह: शापूरजी पलोनजी समूह को एसपी समूह के रूप में भी जाना जाता है इसकी स्थापना 1865 में की गई थी यह कंपनी कई जरुरी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुकी है। यह मुगल-ए-आज़म का निर्माता भी है, जिसका बजट 1.5 करोड़ रुपये था, उस समय बॉलीवुड की सबसे महंगी फिल्म थी। इस समूह का कारोबार कपड़ा, उपकरण, बिजली में भी फैला हुआ है।
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