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भारत की तकनीक से अपनी कोरोना वायरस जांच क्षमता को बढ़ाना चाहता है ये देश, महामारी से हो गया है परेशान
नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया के सैकड़ों देश परेशान हैं। सभी इस महामारी से निजात पाने के लिए वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। रूस की वैक्सीन इस रेस में सबसे आगे बताई जा रही है। कुछ वैक्सीन का ट्रायल तो अंतिम चरणों में है। भारत में भी इसको लेकर तमाम कोशिशें की जा रही हैं। इसी बीच भारत की जांच तकनीक में नीदरलैंड ने रूचि दिखाई है।

दरअसल, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा कोरोना की जांच के लिए विकसित की गई फेलूदा तकनीक के प्रति नीदरलैंड ने रुचि दिखाई है।
CSIR के महानिदेशक शेखर मांडे ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मांडे ने कहा कि 'नीदरलैंड अपनी कोरोना वायरस जांच क्षमता बढ़ाना चाहता है।'
एक न्यूज एंजेंसी की रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि नीदरलैंड ने CSIR से संपर्क किया है। मांडे ने कहा कि 'उन्होंने हमें पत्र लिखकर फेलूदा जांच के प्रति रुचि दिखाई है। हमने अपने वाणिज्यिक साझेदार टाटा समूह को अनुरोध प्रेषित कर दिया है।'
CSIR के महानिदेशक ने ये भी कहा कि फेलूदा जांच तकनीक स्वदेशी है और वैश्विक स्तर पर इसका प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 'फेलूदा जांच आर टी पीसीआर तकनीक से अधिक किफायती है।'
बता दें कि भारत के औषधि महानियंत्रक ने फेलूदा के व्यावसायिक उपयोग को मंजूरी दे दी थी। इस तकनीक का नाम फिल्मकार सत्यजीत रे के जासूसी किरदार फेलूदा के नाम पर रखा गया है। इसे CSIR के जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है।
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