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निर्भयाः बेटे की मौत से पहले मां ने किया खुलासा, कहा आखिरी बार खिलाना चाहती हूं पूड़ी कचौड़ी
नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के 4 दोषियों को कल यानी शुक्रवार की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है। चारों दोषी चौथी बार भी फांसी की तारीख को टालना चाहते थे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। निर्भया के चारों दोषी पवन, विनय, मुकेश और अक्षय को फांसी दी जानी है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने दोषियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। वहीं, दोषी विनय की मां ने अपने बेटे से मिलने की इच्छा जाहिर की है।
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अपने बेटे को मनपसंद ‘‘पूड़ी, सब्जी, कचौड़ी'' खिलाना चाहती हूंः दोषी विनय की मां ने फांसी से ऐन पहले इच्छा जाहिर की है। मां का कहना है कि वह अपने बेटे के लिए आखिरी बार कुछ करना चाहती हैं। मां ने कहा है कि वह अपने बेटे को उसकी मनपसंद ‘‘पूड़ी, सब्जी, कचौड़ी'' खिलाना चाहती है। हालांकि अभी इसकी इजाजत तो नहीं मिली है।
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और क्या कहा विनय की मां नेः अगर भगवान चाहेगा तो वह बच जाएगा.'' उसने कहा, ‘‘सब भगवान की मर्जी है। कोरोना वायरस को देखो। भगवान है जो हर चीज तय करता है कि कौन जीएगा और कौन मरेगा। इंसान के वश की बात नहीं है. न आप और न ही उनके।''
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मां ने कहा, ‘‘तिहाड़ में जेल कर्मियों ने कभी मुझे खाना या कुछ और नहीं ले जाने दिया। लेकिन अगर वे अनुमति देंगे तो मैं उसके लिए कुछ ‘पूड़ी, सब्जी और कचौड़ी' ले जाना चाहूंगी।'' उसने कहा कि वह आखिरी बार अपने बेटे से जेल में जल्द ही मिलने जाएगी।
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पहले सुप्रीम कोर्ट फिर पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज की याचिकाः निर्भया के दोषियों के मौत से बचने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जिसके बाद जारी डेथ वारंट के मुताबिक शुक्रवार की सुबह 5.30 बजे दोषियों को फांसी दी जाएगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी मुकेश की क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दोषियों ने सभी कानूनी अधिकारों का प्रयोग कर लिया है, जिसके बाद अब इस पर कोई विचार नहीं किया जा सकता है। (फाइल फोटोः निर्भया के चारों दोषी)
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तीन बार टल चुकी है फांसीः निर्भया की मां आशा देवी ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दोषियों का डेथ वारंट जारी करने की याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए 7 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 जनवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया। लेकिन दोषियों के कानूनी पैंतरेबाजी के कारण मौत की तारीख टल गई। जिसके बाद कोर्ट ने 1 फरवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया, लेकिन यह तारीख भी टल गई। कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 3 मार्च को मौत देने का आदेश दिया, लेकिन यह तारीख भी टल गई। जिसके बाद कोर्ट ने चौथी बार वारंट जारी करते हुए 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटकाने का आदेश दिया है। (फाइल फोटोः दोषियों ने इसी बस दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया था।)
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नहीं बचा है कोई कानूनी विकल्पः निर्भया के दोषियों के फांसी से बचने के लिए सारे कानून विकल्प खत्म हो गए है। हालांकि दोषी बचने के लिए कोई न कोई तरकीब खोज ही ले रहे हैं। लेकिन चारों दोषियों को मिलने वाले कानूनी विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो गए हैं। अभी तक दोषी इन्हीं विकल्पों के कारण बचते आए है। बावजूद इसके चारों दोषी लगातार कोई न कोई याचिका दाखिल कर फांसी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
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क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड? दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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