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फांसी से पहले हर सेकेंड पर थी 15 लोगों की नजर, निर्भया के दरिंदों की आखिरी रात भी बेचैनी में गुजरी
नई दिल्ली। निर्भया के चार दरिंदों अक्षय ठाकुर, पावन गुप्ता, विनय शर्मा और मुकेश सिंह को सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार शुक्रवार को सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया। तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया सुबह 3.30 बजे शुरू हुई। फांसी से पहले समूचे जेल को लॉकडाउन कर दिया गया था।
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जेल सूत्रों के मुताबिक फांसी से पहले चारों दोषियों की आखिरी रात काफी बेचैनी में गुजरी। आखिरी रात में कैदियों के हर सेकेंड पर नजर रखी जा रही थी। फांसी के लिए सेल से निकाले जाने से पहले तक 15 लोगों की एक टीम जेल के अंदर कैदियों पर नजर गड़ाए हुए थी। जेल प्रशासन को आशंका थी कि फांसी से पहले कैदी आत्महत्या का प्रयास कर सकते हैं।
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कैदी बार-बार उठ रहे थे, करवटें बदल रहे थे। कैदियों की बेचैनी आखिरी के मिनटों में तो कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। जेल में अफसरों के आने के साथ ही फांसी की प्रक्रिया शुरू हो गई।
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जेल के वार्ड में बंद कैदियों को उठाया गया। उन्हें नहाने और कपड़े बदलने को कहा गया। कोई कैदी नहाने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि विनय रोने लगा। जेल सूत्रों के आधार पर छपी रिपोर्ट्स की मानें तो विनय ने कपड़े नहीं बदले। फांसी से पहले कैदियों को चाय दी गई।
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फांसी से कुछ देर पहले चार दोषियों में से एक मुकेश के परिजनों ने मुलाक़ात की। इस दौरान मुकेश और उसके घरवाले लगातार रोते रहे।
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कैदियों को आखिरी रात फांसी घर के ही पास के सेल में रखा गया था। दो कैदी एक सेल में साथ थे जबकि दो कैदियों को अलग अलग सेल में रखा गया। जब सेल से कैदियों को बाहर निकाला गया उनकी हालत काफी खराब थी।
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कैदियों के चेहरे पर चिंता के भाव थे। फांसी के तख्त की ओर बढ़ते कैदियों के कदम लड़खड़ा रहे थे। कैदी रो रहे थे और माफी मांग रहे थे।
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फांसी से पहले दोषियों का मेडिकल चेकअप किया गया। फांसी के तख्त के पास दोषियों और जल्लाद के अलावा सिर्फ पांच लोग मौजूद थे। जेल अधीक्षक, जेल उप अधीक्षक, रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और एक जेल स्टाफ।
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दोषियों ने फांसी से पहले अपनी आखिरी इच्छा नहीं बताई। फंदे पर लटकाए जाने से पहले विनय की हालत बहुत खराब थी।
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