बीरभूम में 7 डकैतों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब एक पूर्व बस ड्राइवर मिनार मंडल के घर पहुंची तो ₹28.5 करोड़ कैश और 15 किलो सोना मिला। आखिर इस खजाने के पीछे कौन सा संगठित अपराध नेटवर्क छिपा है?

बीरभूम: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की तरह, पुलिस महकमे को भी अंदाज़ा नहीं था कि डकैती की योजना बना रहे सात मामूली अपराधियों को पकड़ना उन्हें देश के एक बहुत बड़े काले साम्राज्य के मुहाने पर खड़ा कर देगा। मोहम्मद बाजार पुलिस की एक रूटीन पूछताछ से शुरू हुआ यह सिलसिला, अंततः राज्य सरकार के परिवहन निगम के एक पूर्व बस ड्राइवर के आलीशान ठिकाने पर जाकर रुका। जब पुलिस ने वहां छापा मारा, तो अलमारियों और दीवारों के पीछे से जो कुछ निकला, उसे देखकर अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

नोट गिनते-गिनते हांफने लगीं मशीनें: आधी रात को खुला खौफनाक राज

पब्लिक डोमेन में आई जानकारी के अनुसार, देउचा इलाके में रहने वाले मिनार मंडल के घर पर यह महा-ऑपरेशन बुधवार दोपहर को शुरू हुआ और गुरुवार सुबह तक, यानी लगातार 24 घंटे से अधिक समय तक चलता रहा। जब पुलिस टीम घर के भीतर दाखिल हुई, तो कमरे नोटों की गड्डियों और सोने की ईंटों से पटे पड़े थे। कैश की मात्रा इतनी विशाल थी कि स्थानीय पुलिस को पास के एक बैंक से तुरंत कई नोट गिनने वाली मशीनें मंगवानी पड़ीं। रात भर मशीनों की खड़खड़ाहट के बीच जब गिनती रुकी, तो कुल आंकड़ा ₹28.5 करोड़ कैश पर जाकर थमा। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। तलाशी के दौरान घर के गुप्त कोनों से 15 किलो शुद्ध सोना भी बरामद किया गया, जिसकी बाज़ार में कीमत ₹20 करोड़ से ₹21.5 करोड़ के बीच आंकी गई है। पुलिस ने जब्त की गई कुल बेहिसाब संपत्ति का मूल्य लगभग ₹50 करोड़ बताया है, जिसे बाद में भारी सुरक्षा के बीच लोहे के बड़े-बड़े बक्सों में भरकर ले जाया गया।

Scroll to load tweet…

डकैतों का वो कबूलनामा: कैसे एक पूर्व ड्राइवर बना 'कुबेर'?

इस पूरे मामले का सबसे सस्पेंस भरा पहलू यह है कि आखिर पुलिस को इस गुप्त ठिकाने की भनक कैसे लगी? दरअसल, मोहम्मद बाजार पुलिस स्टेशन की टीम ने मंगलवार को डकैती की योजना बना रहे सात संदिग्धों को दबोचा था। पुलिस की सख्त पूछताछ के आगे आरोपी टूट गए और उन्होंने एक ऐसे नाम का खुलासा किया जो सीधा मिनार मंडल के घर तक जाता था। मिनार मंडल कभी राज्य सरकार के ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में मामूली बस ड्राइवर हुआ करता था, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद वह अचानक पत्थर के कारोबार में उतरा और उसकी किस्मत रातों-रात बदल गई। बीरभूम के पुलिस अधीक्षक विदित राज भुंडेश के अनुसार, शुरुआत में मंडल ने इतनी बड़ी नकदी और सोने पर चुप्पी साध ली थी। लेकिन जब जांच का शिकंजा कसा, तो उसने कबूल किया कि यह अथाह संपत्ति एक बड़े और संगठित अपराध नेटवर्क (Organized Crime Network) से जुड़ी हुई है।

ये भी पढ़ें… 'बिना डरे ड्यूटी करो, ज़िम्मेदारी मेरी होगी': पैलेट गन विवाद के बीच CRPF चीफ ने ऐसा क्यों कहा?

तुलु मंडल कनेक्शन: मवेशी तस्करी और अवैध खनन का काला जाल

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सस्पेंस की परतें और गहरी होती जा रही हैं। पुलिस अब मिनार मंडल के तार क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली और विवादित पत्थर व्यवसायी तुलु मंडल से जोड़कर देख रही है, जो मिनार का करीबी रिश्तेदार बताया जाता है। तुलु मंडल कोई नया नाम नहीं है; उस पर पहले भी अवैध पत्थर खनन के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इतना ही नहीं, साल 2022 में मवेशी तस्करी (Cattle Smuggling) के बड़े रैकेट की जांच के दौरान भी केंद्रीय जांच एजेंसियों ने तुलु मंडल के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच अधिकारी अब इस थ्योरी पर काम कर रहे हैं कि क्या यह ₹50 करोड़ का खजाना असल में तुलु मंडल का ही काला धन है, जिसे छिपाने के लिए इस पूर्व ड्राइवर के घर को एक 'सेफ हाउस' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल मिनार मंडल को सूरी अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग की जा रही है, जिससे इस सिंडिकेट के असली आकाओं का चेहरा बेनकाब हो सके।

Scroll to load tweet…

गिरफ्तारी के बाद बढ़ीं मुश्किलें

पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस ने मिनार मंडल को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया और अदालत में पेश किए जाने की तैयारी की गई, जहां जांच एजेंसी उनकी पुलिस कस्टडी की मांग कर सकती है। फिलहाल अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं।

आखिर किसका है यह करोड़ों का खजाना?

जांच एजेंसियों के सामने अब कई अहम सवाल हैं। क्या यह पैसा किसी संगठित अपराध सिंडिकेट का है? क्या इसके तार अवैध पत्थर खनन या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े हैं? क्या इस पूरे नेटवर्क में और भी बड़े नाम सामने आएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों की जांच तय करेगी। फिलहाल बीरभूम की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित पुलिस रेड में शामिल हो गई है। सात डकैतों की गिरफ्तारी से शुरू हुई जांच अब करोड़ों रुपये की रहस्यमयी संपत्ति और संभावित संगठित अपराध नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच की अगली परत किन नए चेहरों और कितने बड़े खुलासों को सामने लाती है।

ये भी पढ़ें… पूर्व बस ड्राइवर के घर से 5.5 करोड़ कैश, 15 किलो सोना और TMC कनेक्शन...छापेमारी में क्या-क्या मिला?