Delhi Hostel Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में 19 साल के अरपित की दर्दनाक कहानी सामने आई। CA बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन परिवार ने उनकी कॉर्निया दान कर किसी और की दुनिया रोशन कर दी।
साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन में जो 'हॉस्टल डेज' नाम की पांच मंजिला इमारत ढही, उसमे 7 मौतें अब तक सामने आई हैं। दिल को झकझोर कर रख देने वाली इस घटना में बच्चों को खो चुके माता पिता का बुरा हाल है। करीब 50 साल पुरानी इमारत में कथित तौर पर बेसमेंट में अनधिकृत मरम्मत का काम चल रहा था। दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक इमारत भरभराकर गिर गई। इस हादसे में जान गंवाने वालों में 19 साल के अरपित जाज भी थे। मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले अरपित दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्मा राम सनातन धर्म में बीकॉम सेकेंड ईयर छात्र थे। जिस दिन हासदा हुआ, उसी दिन सुबह अरपित भी वहां घर से पहुंचे थे। officialhumansofbombay के मुताबिक अरपित के माता पिता ने बच्चे के आंखों की रोशनी से किसी के जीवन को रौशन करने का निर्णय ले लिया है।
बेटे की आंखों से किसी और की दुनिया होगी रोशन
इस असहनीय दुख के बीच अरपित के माता-पिता ने ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी इंसानियत की मिसाल कायम कर दी। अंतिम संस्कार के लिए रवाना होने से पहले परिवार ने AIIMS में अरपित की कॉर्निया दान कर दी।अरपित सीए नहीं बन सके, अपनी डिग्री पूरी नहीं कर सके और जिंदगी के वे सपने भी पूरे नहीं कर पाए, जिन्हें लेकर वह पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उनकी आंखों से अब किसी दूसरे इंसान की दुनिया रोशन हो सकती है।
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मां फोन करती रहीं, लेकिन नहीं मिला जवाब
दोपहर में इमारत गिरने के बाद अरपित का परिवार परेशान हो गया। उनकी मां लगातार उन्हें फोन करती रहीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। रिश्तेदार दिल्ली पहुंचे और करीब 27 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच अरपित की तलाश होती रही। शाम करीब 6 बजे AIIMS ट्रॉमा सेंटर में उनकी पहचान की गई। पुत्र को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल था। अस्पताल में पिता भूपेंद्र ने अपने बेटे को आखिरी बार देखा। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की जिंदगी में अभी बहुत कुछ बाकी था।
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