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Delhi Satya Niketan PG: 55 गज में 30 कमरे, 60 छात्र...वायरल रेंट एग्रीमेंट और चौंकाने वाली शर्तें!
Satya Niketan PG: दिल्ली के सत्य निकेतन में ढहे 'हॉस्टल डेज़' के वायरल रेंट एग्रीमेंट ने हड़कंप मचा दिया है। जानिए कैसे एकतरफा शर्तों के बीच 50 साल पुरानी अवैध 5 मंजिला इमारत गिर गई, जिसमें 7 लोगों की मौत के बाद 5 अफसर सस्पेंड और मालिक गिरफ्तार हुए।

Delhi PG Hostel: 7 मौतें, सख्त नियम...लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
Satya Niketan PG Collapse Update: साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन में जो 'हॉस्टल डेज़' नाम की पांच मंज़िला इमारत ढही, उसमें सात बेकसूरों की जान चली गई। हादसे के बाद अब उस हॉस्टल का रेंट एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस एग्रीमेंट को पढ़कर कोई भी हैरान रह जाएगा कि दिल्ली में पढ़ाई करने आने वाले छात्रों से कैसे कागजों पर दस्तखत कराकर उनसे सुरक्षा का हक तक छीन लिया जाता है।

एग्रीमेंट की वो बारीक शर्तें, जो हैं बेहद चौंंकाने वाली
एग्रीमेंट की बारीक शर्तों में साफ-साफ लिखा था कि अगर हॉस्टल के अंदर कोई दुर्घटना होती है या किसी छात्र को कोई नुकसान पहुंचता है, तो पीजी अथॉरिटी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। यानी छात्र पैसा भी पूरा दें और अपनी जान का जोखिम भी खुद ही उठाएं। यह एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हादसे के एक दिन बाद सामने आए इस दस्तावेज ने दिल्ली के प्राइवेट PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर बहस और तेज कर दी है।
Delhi PG Safety: 3 महीने की एडवांस सिक्योरिटी और मनमानी शर्तें: कैसा था 'हॉस्टल डेज़' का एग्रीमेंट?
इस एग्रीमेंट में किराएदार यानी छात्रों की जिम्मेदारियों की एक लंबी लिस्ट थी। छात्रों से 3 महीने की सिक्योरिटी और 1 महीने का एडवांस किराया वसूला जाता था। शर्त यह भी थी कि एग्रीमेंट पूरा होने से पहले किसी भी हालत में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं होगा। अगर फर्नीचर या कमरे में कुछ टूट-फूट हुई, तो उसकी भरपाई भी इसी डिपॉजिट से काटी जाएगी। इतना ही नहीं, दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर लगाने तक की मनाही थी।
शर्तें ऐसी जो किसी ने कभी सोची न रही होंगी?
अगर कोई छात्र समय से पहले कमरा खाली करता-चाहे वजह कोई भी हो या उसे अनुशासन के नाम पर निकाल दिया जाए-तो जमा किया गया एक भी रुपया रिफंड नहीं किया जाना था। अलग से जोड़े गए नियम-शर्तों के डॉक्यूमेंट में लिखा था कि आग, भूकंप, सीलिंग, भारी बारिश या प्राकृतिक आपदाओं की वजह से अगर किसी छात्र को चोट लगती है या सामान का नुकसान होता है, तो हॉस्टल कोई मुआवजा नहीं देगा। इसके अलावा मैनेजमेंट को जब चाहे छात्र का कमरा बदलने या बिना रिफंड दिए बाहर निकालने का पूरा अधिकार था।
Delhi Building Collapse: 50 साल पुरानी इमारत, 2 मंजिल की इजाजत पर तान दी 5 मंजिला 'मौत की दुकान'
जांच में जो बातें निकलकर सामने आई हैं, वे और भी चौंकाने वाली हैं। लगभग 50 साल पुरानी यह इमारत एक रीसेटलमेंट कॉलोनी में महज 55 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर बनी थी। MCD अधिकारियों के मुताबिक, यहाँ सिर्फ दो मंजिल बनाने की इजाजत थी और कोई भी बिल्डिंग प्लान पास नहीं कराया गया था। यह पूरी तरह से रिहायशी मकान था, जिसे गैर-कानूनी तरीके से कमर्शियल हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया।
माकिन मालिक की लालच बना बच्चों का काल
इसमें करीब 30 कमरे बनाए गए थे, जिनमें 60 से ज्यादा छात्रों को ठूंसा गया था। मकान मालिक हरिराम बंसल ने इस जर्जर इमारत की लीपापोती में कई महीने लगाए और इसी साल अगस्त में इसमें छात्रों को बसाना शुरू किया। हादसा जिस वक्त हुआ, उस वक्त भी बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। मलबे से निकाले गए 11 लोगों में दो मजदूर भी थे, जिनमें से एक की मौत हो गई।
Satya Niketan PG Case: मालिक का परिवार गिरफ्तार
सत्य निकेतन हादसे के मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला और उनका बेटा महेश बंसल शामिल हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, संपत्ति के बिजली कनेक्शन हरिराम बंसल और महेश बंसल के नाम पर दर्ज हैं, जबकि प्रॉपर्टी उर्मिला के नाम पर रजिस्टर्ड बताई गई है। हादसे के बाद बिल्डिंग के निर्माण, इस्तेमाल और उसकी जिम्मेदारी को लेकर जांच एजेंसियां कई पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
Delhi Student Safety: 5 सीनियर MCD अधिकारी सस्पेंड
हादसे के अगले ही दिन दिल्ली नगर निकाय ने पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों में साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) आशीष कुमार शामिल हैं। इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। सवाल यह है कि अगर इमारत के निर्माण और इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी हुई थी, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
MCD के नोटिस और हाई कोर्ट की फटकार ने खोले सिस्टम के छेद
हैरानी की बात यह है कि 6 सितंबर को MCD ने पास की प्रॉपर्टी नंबर 13 को खतरनाक घोषित करते हुए गिराने का आदेश दिया था, जबकि जो इमारत ढही, वह प्रॉपर्टी नंबर 14 थी। यानी बगल की बिल्डिंग खतरनाक थी, लेकिन उसके ठीक साथ बनी इस जर्जर 5 मंजिला अवैध हॉस्टल पर किसी का ध्यान नहीं गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पूरे हादसे की हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बाहर से आने वाले छात्रों के लिए दिल्ली में हॉस्टलों की हालत बेहद खराब और चिंताजनक है।
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