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12 घंटे में अंग्रेजों ने किया था 1500 आदिवासियों का कत्ल, खून से लाल हो गया था मानगढ़ का पहाड़
बासवाड़ा(Rajsthan). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए आ रहे हैं। भारत के इतिहास में यही वह स्थल है जहां सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। करीब 110 साल पहले अंग्रेजों ने यहां आदिवासियों पर इस तरह से हमला किया कि घटना में करीब 15 सौ से ज्यादा आदिवासियों की मौत हो गई। अंग्रेजों ने आदिवासियों को गोलियों से इस तरह छलनी किया कि पूरा पहाड़ और नीचे की जमीन तक खून से सन गई थी।

मानगढ़ धाम पर शोध करने वाले कन्हैयालाल बताते हैं कि आदिवासियों के पूज्यनीय गुरु गोविंद का जन्म करीब 1858 में बांसवाड़ा के नजदीकी जिले डूंगरपुर में हुआ था। 1903 में उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने के लिए एक संगठन बनाया।
इस दौरान पूरे देश में अंग्रेजों का शासन था। जिनकी प्रताड़ना से आम जनता बुरी तरह से परेशान हो चुकी थी। ऐसे में गुरु गोविंद ने ही अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की थी।
अंग्रेजों को यह बात पता चली तो उन्होंने इन आदिवासी लोगों पर हमले की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन आदिवासियों को इस बात की बिल्कुल भी खबर नहीं थी कि उनके साथ कुछ ऐसा होने वाला है। फिर दिन आया 17 नवंबर 1913 का। जगत गुरु गोविंद का जन्मदिन मनाने के लिए आदिवासी मानगढ़ धाम की पहाड़ी पर जुटे हुए थे।
इसी दौरान तीनों और से अंग्रेजो ने आदिवासियों को घेर लिया। इसके बाद बंदूक और तोपों से आदिवासियों पर हमले किए गए। इतिहासकार बताते हैं कि यह हमला करीब 12 घंटे से भी
ज्यादा चलता रहा।
इतिहासकारों की मानें तो मानगढ़ धाम नरसंहार अबतक का सबसे बड़ा नरसंहार होता लेकिन यह उस समय अंग्रेजों के शासन के अधीन नहीं आता था। ऐसे में इतिहास में इसे यही माना जाता है कि रियासत और रजवाड़ों से यह लड़ाई हुई थी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मैं अपनी एक सभा ने कहा था कि उन्हें दुख है कि वह मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं कर पाए। लेकिन इस बार भाजपा करेगी पिछले 1 साल से इसी काम में लगी हुई थी। पार्टी से जुड़े संगठन में जहां मानगढ़ धाम की मिट्टी लेकर यात्रा निकाली थी तो कुछ नेता लगातार यहां सर्वे कर रहे थे।
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