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चैटिंग या वीडियो कॉल? WhatsApp पर करें ये 1 काम और बना लें फेविकोल की जोड़ सा मजबूत रिश्ता

First Published Nov 18, 2020, 5:15 PM IST
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रिलेशनशिप डेस्क: आज के समय में लोग एक-दूसरे से सोशल मीडिया के जरिये ही ज्यादा जुड़े रहते हैं। कई लोगों को चैटिंग की आदत होती है। वो किसी का कॉल उठाने की जगह मैसेज का रिप्लाई करना पसंद करते हैं। लेकिन नए रिसर्च में ऐसे लोगों के लिए खतरे की घंटी बजाई गई है। फिलहाल फेसबुक के अलावा व्हाट्सएप पर भी लोग चैट करते हैं। लेकिन एक स्टडी में सामने आया है कि चैटिंग करने से रिश्ते कमजोर होते हैं। इसकी जगह आप सीधे कॉल लगा लें। इस एक छोटी सी चीज से आपका रिश्ता मजबूत हो जाएगा। चैटिंग से जहां रिश्ते कमजोर होते हैं वहीं एक कॉल या वीडियो कॉल से रिश्ते मजबूत हो जाते हैं। 

सोशल मीडिया ने लोगों को आपस में 24 घंटे के लिए जोड़ दिया है। आप कहीं से भी किसी से भी जुड़े रह सकते हैं। इसने लोगों के बीच की दुरी कम कर दी है। लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है कि सिर्फ चैट के जरिये ही आप रिश्ते मजबूत कर रहे हैं तो आप ग़लतफ़हमी में हैं। 

सोशल मीडिया ने लोगों को आपस में 24 घंटे के लिए जोड़ दिया है। आप कहीं से भी किसी से भी जुड़े रह सकते हैं। इसने लोगों के बीच की दुरी कम कर दी है। लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है कि सिर्फ चैट के जरिये ही आप रिश्ते मजबूत कर रहे हैं तो आप ग़लतफ़हमी में हैं। 

नए रिसर्च में सामने आया है कि मैसेज या चैट पर बात करने से रिश्ते असल में कमजोर होते हैं। चैटिंग के दौरान दो लोगों के बीच ग़लतफ़हमी होने के चान्सेस बढ़ जाते हैं। ऐसे में रिश्ते टूटने की नौबत भी आ सकती है।  

नए रिसर्च में सामने आया है कि मैसेज या चैट पर बात करने से रिश्ते असल में कमजोर होते हैं। चैटिंग के दौरान दो लोगों के बीच ग़लतफ़हमी होने के चान्सेस बढ़ जाते हैं। ऐसे में रिश्ते टूटने की नौबत भी आ सकती है।  

इंसान रिप्लाई में हंसने वाले इमोजी का इस्तेमाल कर रहा हो सकता है लेकिन असल में वो परेशान भी हो सकता है। ऐसे में चैटिंग किसी की फीलिंग्स सही से नहीं दर्शा पाता। 
 

इंसान रिप्लाई में हंसने वाले इमोजी का इस्तेमाल कर रहा हो सकता है लेकिन असल में वो परेशान भी हो सकता है। ऐसे में चैटिंग किसी की फीलिंग्स सही से नहीं दर्शा पाता। 
 

अमेरिकी लेबर सप्लाई कंपनी ने अपने 8 हजार कर्मचारियों पर सर्वे किया था। इसमें पांच में से चार लोगों को वर्क फ्रॉम होम पसंद है। लेकिन इस दौरान बातचीत ना होने से उनमें कम्युनिकेशन गैप देखने को मिला। 

अमेरिकी लेबर सप्लाई कंपनी ने अपने 8 हजार कर्मचारियों पर सर्वे किया था। इसमें पांच में से चार लोगों को वर्क फ्रॉम होम पसंद है। लेकिन इस दौरान बातचीत ना होने से उनमें कम्युनिकेशन गैप देखने को मिला। 

इसमें पता चला कि सिर्फ टेक्स्ट से जुड़े कर्मचारी अकेलापन महसूस करने वालों में शामिल थे।  कॉल करते थे या वीडियो कॉल यूज करते थे, वो ज्यादा कनेक्टेड फील करते थे। 

इसमें पता चला कि सिर्फ टेक्स्ट से जुड़े कर्मचारी अकेलापन महसूस करने वालों में शामिल थे।  कॉल करते थे या वीडियो कॉल यूज करते थे, वो ज्यादा कनेक्टेड फील करते थे। 

कुछ लोगों को बातचीत करने से ज्यादा चैट करना पसंद होता है। वो अपनी फीलिंग्स लिखकर एक्सप्रेस करते हैं। लेकिन ऐसे लोग ज्यादा अकेले पाए गए। 

कुछ लोगों को बातचीत करने से ज्यादा चैट करना पसंद होता है। वो अपनी फीलिंग्स लिखकर एक्सप्रेस करते हैं। लेकिन ऐसे लोग ज्यादा अकेले पाए गए। 

वहीं जो इन ऐप्स के जरिये कॉल या सीधे वीडियो कॉल लगा लेते थे, वो ज्यादा खुश और संतुष्ट नजर आए। ऐसे में आगे से आप भी कोशिश करें कि मैसेज करने की जगह 5 मिनट के लिए कॉल ही लगा लें।  
 

वहीं जो इन ऐप्स के जरिये कॉल या सीधे वीडियो कॉल लगा लेते थे, वो ज्यादा खुश और संतुष्ट नजर आए। ऐसे में आगे से आप भी कोशिश करें कि मैसेज करने की जगह 5 मिनट के लिए कॉल ही लगा लें।  
 

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