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Afghanistan में नई सरकार बनने के बाद Pakistan का क्या होगा, Taliban के साथ उसके कैसे संबंध हैं?
काबुल. अफगानिस्तान में सत्ता का परिवर्तन हुआ है। तालिबान ने बंदूक के दम पर कब्जा कर लिया है। अब नई सरकार तालिबान के लोग चलाएंगे। वे ही अफगानिस्तान का भविष्य तय करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान के सेकंड मैन माने जाने वाले मुल्ला बरादर को सरकार की कमान सौंपी जा सकती है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि तालिबान की नई सरकार से पाकिस्तान पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अफगानिस्तान का न्यू चीफ 8 साल तक पाकिस्तान की जेल में रहा...

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच 2570 किमी. का साझा बॉर्डर
अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का एक अनोखा रिश्ता है। वे 2570 किमी (1600 मील) की सीमा साझा करते हैं। वे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार हैं। सांस्कृतिक, जातीय और धार्मिक रूप से भी कई समानता है। पूर्व अफगान नेता हामिद करजई ने एक बार तो दोनों देशों को न अलग होने वाले भाई कहा था।
9/11 के बाद पाकिस्तान ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ US के साथ
कई मीडिया रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स के जरिए जो बात निकलकर सामने आई है, उसके मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और तालिबान पर दांव लगाया है। 9/11 के हमलों के बाद पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में खुद को अमेरिका के सहयोगी के रूप में होने का दावा किया है। लेकिन समय-समय पर ये भी सामने आया कि पाकिस्तान के सेना और खुफिया विभाग के लोगों ने तालिबान से भी संबंध बनाए रखा।
काबुल पर तालिबान का कब्जा करने के बाद इमरान खान ने कहा था कि गुलामी की जंजीरें टूट रही हैं। हालांकि, इस समर्थन का मतलब यह नहीं है कि वह काबुल में कब्जे के बाद रिलेक्स है। अफगानिस्तान से सीमा पर हमले शुरू करने वाले तालिबान ने पाकिस्तानियों को पिछले कुछ सालों में भारी नुकसान पहुंचाया है।
पाकिस्तान को शरणार्थियों की सबसे बड़ी चिंता
पाकिस्तान की दूसरी बड़ी परेशानी शरणार्थियों को लेकर है। पाकिस्तान में पहले से ही पिछले युद्धों से लगभग तीन मिलियन अफगान शरणार्थी रह रहे हैं। पाकिस्तान की हालत पहले से ही खराब है। ऐसे में वह अपने ऊपर और ज्यादा भार लेने की हालत में नहीं है।
पाक ने कहा, और शरणार्थियों को लेने की क्षमता नहीं
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर मोअज्जम अहमद खान ने कहा, हमारे पास और अधिक शरणार्थियों को लेने की क्षमता नहीं है। इसलिए मैं सुझाव दे रहा हूं कि इस मुद्दे पर सभी को एकसाथ बैठकर सोचना चाहिए।
वेस्ट के साथ पाकिस्तान के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
वेस्ट के साथ पाकिस्तान के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं। शायद सबसे खराब अमेरिका के साथ हैं। क्योंकि जो बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद से प्रधानमंत्री इमरान खान को फोन तक नहीं किया।
अमेरिका के एक्स नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने कहा, अगर पाकिस्तान ने जिहादी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद नहीं किया तो उसे खारिज माना जाएगा।
मुल्ला बरादर करीब 8 साल तक पाकिस्तान जेल में रहा है
इन सबके बीच एक बड़ा सवाल ये भी है कि अफगानिस्तान में नई सरकार की कमान संभालने वाला मुल्का बरादर करीब 8 साल तक पाकिस्तान की कैद में रहा है। अमेरिका के कहने पर उसे छोड़ा गया। ऐसे में अब अफगानिस्तान का न्यू चीफ बनने के बाद पाकिस्तान के प्रति उसे रवैया कैसा होगा, ये आने वाला वक्त ही बताएगा।
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