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खुद की जान खतरे में डाल इस महिला ने आतंकियों से लिया लोहा.. जानिए विमान में सवार 360 पैसेंजर्स को कैसे बचाया
ट्रेंडिंग डेस्क। एक लड़की जो बचपन से चुलबुली और चंचल थी, उसे देखकर कोई ये नहीं जान पाया कि बड़ी होकर यह इतनी बड़ी शहादत देगी कि उसका नाम इतिहास पन्नों में दर्ज हो जाएगा। कोई ये अंदाजा नहीं लगा पाया कि ये बहादुर थी, मगर इतनी हिम्मती भी होगी कि एक दिन आतंकियों से लोहा लेगी और 360 पैसेंजर्स की जान बचाएगी। आज जब वह नहीं है, तब हर कोई उसके जज्बे, हिम्मत और हौसले को सलाम कर रहा है। हम बात कर रहे हैं नीरजा भनोट की, जिनका जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। बचपन में मां-बाप उसे लाडो कहकर पुकारते थे, मगर उनकी लाडो ने एक दिन जान देकर न सिर्फ लोगों की जान बचाई बल्कि, खूंखार आतंकियों के छक्के छुड़ाते हुए उनके खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर दिए। आइए तस्वीरों के जरिए नीरजा से जुड़ी कुछ रोचक बाते जानते हैं।

नीरजा के पिता का नाम हरीश भनोट था और मां का नाम रमा। हरीश पत्रकार थे जबकि रमा गृहणी। शुरुआत में वे चंडीगढ़ रहे, मगर बाद में वे मुंबई आकर बस गए।
मां-बाप ने पहले ही तय किया हुआ था कि बेटी हुई तो उसका नाम लाडो रखेंगे और ऐसा ही हुआ। नीरजा को वे प्यार से लाडो कहकर ही पुकारते थे।
नीरजा की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंडीगढ़ के सैकरेड हार्ट सीनीयर सेकेंडरी स्कूल से हुई और बाद में उन्होंने मुंबई के बॉम्बे स्काटिश स्कूल से आगे की पढ़ाई पूरी की।
नीरजा बचपन से चंचल और चुलबुली थी। उसे राजेश खन्ना बेहद पसंद थे और बहादुरी की मिसाल ये लड़की अलग ही जज्बे, हिम्मत और हौसले से भरी पड़ी थी।
पढ़ाई-लिखाई पूरी होने के बाद माता-पिता ने सबकी पसंद से एक बिजनेसमैन लड़का पसंद किया और नीरजा की उससे शादी कर दी। शादी के बाद नीरजा विदेश चली गई।
मगर किसी को क्या पता था कि पति जल्लाद और लालची निकलेगा। दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा, तो वह लौटकर मुंबई अपने घर आ गई। इसके बाद उसने अपने पैर पर खड़े होने की सोची।
उसने मॉडलिंग शुरू की और बाद में पैन एम एयरलाइंस में फ्लाइट अटेंडेंट की जॉब कर ली। कंपनी की ओर से उसे इस दौरान एंटी-हाईजैकिंग कोर्स भी कराया गया और यही बाद में उसके काम आया।
वह 5 सितंबर 1986 का दिन था। दो दिन बाद उसका जन्मदिन पड़ने वाला था। वह फ्लाइट से मुंबई से अमरीका जा रही थी, मगर कराची एयरपोर्ट पर चार आतंकियों ने इस विमान का अपहरण कर लिया।
विमान में 360 यात्री और 19 क्रू मेंबर सवार थे। नीरजा ने पायलट को इसकी जानकारी दी, तो वह दो अन्य साथियों के साथ विमान छोड़कर भाग गया। इसके बाद नीरजा ने इमरजेंसी गेट खोल दिया, जिससे यात्री विमान से कूदने लगे।
आतंकियों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने हीरोइन ऑफ हाइजैक नीरजा की गोली मारकर हत्या कर दी। मगर मरने से पहले नीरजा पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स की जान बचाने में सफल हो गई थी।
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