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दीपावली पर देवी लक्ष्मी को लगाएं इन 5 चीजों का भोग, जेब में भरा रहेगा पैसा

First Published Nov 14, 2020, 9:39 AM IST
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उज्जैन. इस बार 14 नवंबर, शनिवार को दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन प्रत्येक हिंदू परिवार में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं व भोग लगाए जाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारें में बता रहे हैं, जिनका भोग लगाने से महालक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देती हैं।

खीर
दूध व चावल शुक्र ग्रह से संबंधित हैं। शुक्र के कारण ही जीवन में भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से शुक्र ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं व धन, वैभव मिलते हैं।
 

खीर
दूध व चावल शुक्र ग्रह से संबंधित हैं। शुक्र के कारण ही जीवन में भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से शुक्र ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं व धन, वैभव मिलते हैं।
 

सिंघाड़ा
सिंघाड़ा एक तरह का मौसमी फल है। इसकी खेती भी तालाब के पानी में की जाती है। जल से उत्पन्न होने के कारण ही यह माता लक्ष्मी को बहुत प्रसन्न है। सिंघाड़ा स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा माना गया है।

सिंघाड़ा
सिंघाड़ा एक तरह का मौसमी फल है। इसकी खेती भी तालाब के पानी में की जाती है। जल से उत्पन्न होने के कारण ही यह माता लक्ष्मी को बहुत प्रसन्न है। सिंघाड़ा स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा माना गया है।

श्रीफल यानी नारियल
नारियल को श्रीफल भी कहते हैं। श्री का एक अर्थ लक्ष्मी भी है। इसलिए नारियल को देवी लक्ष्मी का फल भी कहा जाता है। महालक्ष्मी को नारियल चढ़ाने से कई प्रकार के संकट अपने आप ही दूर हो जाते हैं।
 

श्रीफल यानी नारियल
नारियल को श्रीफल भी कहते हैं। श्री का एक अर्थ लक्ष्मी भी है। इसलिए नारियल को देवी लक्ष्मी का फल भी कहा जाता है। महालक्ष्मी को नारियल चढ़ाने से कई प्रकार के संकट अपने आप ही दूर हो जाते हैं।
 

मखाना
मखाना एक तरह का ड्रॉय फ्रूट है। माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र यानी पानी से ही हुई है और मखाना भी पानी में ही पैदा होता है इसलिए माता लक्ष्मी को मखाने का भोग लगाने से वे अति प्रसन्न होती हैं।
 

मखाना
मखाना एक तरह का ड्रॉय फ्रूट है। माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र यानी पानी से ही हुई है और मखाना भी पानी में ही पैदा होता है इसलिए माता लक्ष्मी को मखाने का भोग लगाने से वे अति प्रसन्न होती हैं।
 

बताशा
बताशा शक्कर से बनता है और शक्कर गन्ने के रस से। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गन्ने का रस चंद्रमा से संबंधित है और चंद्रमा को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इसलिए लक्ष्मी पूजा में बताशे का उपयोग किया जाता है।
 

बताशा
बताशा शक्कर से बनता है और शक्कर गन्ने के रस से। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गन्ने का रस चंद्रमा से संबंधित है और चंद्रमा को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इसलिए लक्ष्मी पूजा में बताशे का उपयोग किया जाता है।
 

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