हरियाणा के पानीपत में लोन डिफाल्टर का मकान सील करते वक्त कर्मचारियों ने इतनी जल्दबाजी दिखाई कि यह तक पता नहीं किया कि अंदर कोई है या नहीं। बाद में कलेक्टर के आदेश पर सील तोड़ी गई और लड़कियों को बाहर निकाला गया।

पानीपत, हरियाणा. बैंक कर्मचारियों की जल्दबाजी और लापरवाही ने दो बहनों की धड़कनें बढ़ा दीं। लोन न चुकाने पर बैंक घर सील करके चले गए। लेकिन उन्होंने यह देखना तक मुनासिब नहीं समझा कि घर में कोई है तो नहीं। नतीजा शख्स की दो बेटियां अंदर बंद हो गईं। बाद में कलेक्टर के आदेश पर सील तोड़ी गई और लड़कियों को बाहर निकाला गया।

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ऊपरवाले कमरे में सो रही थीं दोनों बहनें..
वार्ड-23 में रहने वाले पूर्व पार्षद शीला ने 'द पानीपत अर्बन कोऑपरेटिव बैंक' से लोन लिया हुआ था। उसे न चुकाने पर गुरुवार को बैंक कर्मचारी घर सील करने पहुंचे। उस वक्त पार्षद घर पर नहीं थीं। उनकी दोनों बेटियां घर के ऊपरवाले कमरे में सो रही थीं। कर्मचारियों ने बगैर देखे घर सील कर दिया और वहां से चले गए। बैंक कर्मचारियों के साथ कुछ पुलिसवाले भी थे। कुछ देर बाद जब दोनों बहनों कविता और सरिता की नींद खुली, तब उन्हें घर सील होने का पता चला। इसके बाद वे बालकनी में खड़ी हो गईं। छोटी बहन रोने लगी। वहीं बड़ी बहन मदद के लिए गुहार लगाने लगी। देर शाम पूर्व पार्षद कलेक्टर से मिलीं। इसके बाद घर खोला गया। पूर्व पार्षद ने 70000 से ऊपर का लोन चुकाया। बाकी रकम चुकाने उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। 

पूर्व पार्षद ने बताया कि उनके दिवंगत पति राजबीर ने 2015 में बैंक से 5 लाख रुपए का लोन लिया था। तीन लाख रुपए वे लौटा चुकी हैं। इसके बावजूद बैंक ने ब्याज सहित 4.30 लाख रुपए रिकवरी निकाल दी। उधर, बैंक के चेयरमैन ओपी शर्मा ने कहा कि मकान की वीडियोग्राफी कराई गई थी। अंदर कोई नहीं था। यह सब ड्रामेबाजी थी। लड़कियां बाद में अंदर गई होंगी।