हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भाजपा के ऐसे नेताओं में शुमार हैं, जो पब्लिक के बीच यूं मिलते हैं, जैसे वर्षों से ताल्लुकात हों। सोमवार को कश्मीरी पंडित खट्टर से मिलने पहुंचे। कश्मीर से धारा 370 खत्म करने के बाद कश्मीरी पंडितों और खट्टर की यह पहली मुलाकात थी। इस दौरान खट्टर भी कश्मीर से जुड़ी एक घटना को याद करके भावुक हो उठे।

पानीपत. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ऐसे मुख्यमंत्रियों में शुमार हैं, जिनसे कोई भी आम व्यक्ति सहजभाव से मिल सकता है, बात कर सकता है। सोमवार को बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित उनसे मिलने पहुंचे। वे कश्मीर से धारा 370 खत्म किए जाने की खुशी जाहिर करने पहुंचे थे। इस मौके पर खट्टर भी कश्मीर से जुड़ी एक घटना को याद करते हुए भावुक हो उठे।

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खट्टर ने बताया कि वे जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रभारी भी रहे हैं। एक बार की बात है, जब वो श्रीनगर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उनके काफिले पर पत्थर फेंके जाने लगे। लेकिन वो घबराए नहीं। आगे बढ़ते गए। हालांकि खतरा लगातार बना हुआ था। खट्टर उन पलों को याद करके भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और गृहमंत्री अमित शाह का यह निर्णय इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा।

कश्मीरी पंडितों ने सुनाई दुखद कहानियां
सोमवार को कश्मीरी पंडित खट्टर से मिलने विधानसभा पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ में करीब 1500 और हरियाणा और पंजाब को मिलाकर करीब 2500 परिवार यहां रहते हैं। इनकी आबादी करीब 10 हजार होगी। एक पंडित फूल रैना ने बताया कि उन्हें रात को अपना घर छोड़कर चंडीगढ़ भागना पड़ा था। कश्मीर में हालात बहुत खराब थे। कर्फ्यू लगा हुआ था। धारा 370 खत्म किए जाने की उन्हें बहुत खुशी है। क्योंकि वे ही जानते हैं कि उन्हें किस बुरे दौर से गुजरना पड़ा। उनकी जमीन-जायदाद तक हड़प ली गईं। उन्होंने कश्मीर लौटने की इच्छा जताई।

जेहन में जिंदा हैं कश्मीर की यादें
कश्मीरी सहायक सभा के महासचिव राजेश ने बताते हैं कि उन्हें अपने 50 लाख रुपए के प्लॉट को बेहद सस्ते में बेचकर भागना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मोदी और शाह ने उनके जीवन में ऊर्जा का संचार किया है। आज सही मायने में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है।