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संतान रेखा पर तिल या लाल निशान का होना होता है अशुभ, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

हर नवविवाहित जोड़े के मन में बच्चों को लेकर कई सपने होते हैं और साथ ही कई सवाल भी। हर ज्योतिषी और हस्तरेखा विशेषज्ञ व जानकारों से सबसे पहला और ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल संतान से संबंधित ही होते हैं।

Astrology Jyotish Palmistry facts about child palm lines MMA
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Ujjain, First Published Nov 28, 2021, 7:00 AM IST
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उज्जैन. कुछ लोग जानना चाहते हैं कि उनकी कितनी संतान होंगी, कितने बेटे और कितनी बेटियां होंगी। जन्म कुंडली और हथेली की हथेलियों में इन सभी सवालों के जवाब छिपे होते हैं। संतान से जुड़े हर सवाल का जवाब व्यक्ति की हस्तरेखा देखकर दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए हस्तरेखा विशेषज्ञ का कुशल और सूक्ष्म अध्ययन करने वाला होना आवश्यक है। आज हम आपको संतान से जुड़े कुछ ऐसे ही हस्तरेखा संकेतों के बारे में बता रहे हैं। आगे जानिए इनके बारे में खास बातें…

हथेली में यहां होती है संतान रेखा
- हस्त सामुद्रिक शास्त्र में संतान रेखाएं कनिष्ठिका अंगुली के मूल में बुध पर्वत के ऊपर की ओर होती है। हथेली के बाहर की ओर से भीतर आने वाली क्षैतिज या हॉरिजेंटल लाइन विवाह रेखा कहलाती है।
- मोटे तौर पर देखा जाए तो विवाह रेखा बुध पर्वत को दो भागों में विभाजित करती है। इस विवाह रेखा के ऊपर और कनिष्ठिका अंगुली के मूल के बीच का जो भाग होता है उसमें खड़ी रेखाएं संतान रेखाएं होती हैं।
- ये रेखाएं स्पष्ट, लालिमा लिए हुए होनी चाहिए। आदर्श स्थिति में संतान रेखाएं अधिक गहरी नहीं होनी चाहिए। संतान का विचार शुक्र पर्वत पर स्थित रेखाओं से भी किया जाता है।
- चूंकि शुक्र पर्वत से कामेच्छा और यौन संबंधों के बारे में भी देखा जाता है इसलिए यहां से भी संतान का विचार करना चाहिए।

संतान रेखा से जुड़ी खास बातें
1.
सूक्ष्मता से अध्ययन करने पर संतान रेखाएं आसानी से गिनी जा सकती हैं। ये जितनी रेखाएं होती हैं जातक की उतनी ही संतानें होने का योग होता है।
2. जितनी गहरी और सीधी रेखाएं होती हैं वे पुत्र संतान की प्रतीक होती हैं और जितनी महीन, कोमल, बारीक रेखाएं होती हैं वे पुत्री संतान की संख्या दर्शाती हैं।
3. संतान रेखाएं स्पष्ट, निर्दोष, बिना कटी-फटी होनी चाहिए। इससे संतान योग उत्तम बनता है।
4. संतान रेखा पर द्वीप का चिन्ह होना संतान के कमजोर स्वास्थ्य की ओर संकेत करता है।
5. संतान रेखा पर तिल होने से संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है। कटी-फटी संतान रेखाएं संतान सुख से वंचित कर सकती हैं।
6. संतान रेखाएं नीचे से ऊपर की ओर जाती हैं। यदि इसके अंतिम सिरे दो भागों में बंट गए हैं तो संतान को भारी संकटों और कष्टों का सामना करना पड़ता है।
7. संतान रेखा पर लाल तिल संतान के कमजोर स्वास्थ्य और अल्पायु होने का संकेत करता है।

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