शनि ग्रह सौर मंडल में सबसे धीरे चलने वाले ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में इस ग्रह का सबसे अधिक माना जाता है। हमारे धर्म ग्रंथों में शनि को न्याय का देवता कहा जाता है यानी व्यक्ति के उसके अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनिदेव से ही प्राप्त होता है।

उज्जैन. शनिदेव 2 तरह की चाल चलते हैं, उनमें से एक है मार्गी और दूसरी वक्री। मार्गी यानी सीधी चाल और वक्री यानी टेढ़ी चाल। 23 मई से शनि टेढ़ी चाल चल रहे थे। 11 अक्टूबर से शनि पुन: सीधी चाल से चलने लगे हैं। शनि की सीधी चाल कुछ राशि के लोगों के लिए शुभ रहेगी तो कुछ के लिए अशुभ फल देने वाली रहेगी। 

इन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती और ढय्या
24 जनवरी 2019 से शनिदेव मकर राशि में हैं। मकर शनि के ही स्वामित्व की राशि है। शनि के मकर राशि में विराजमान होने के कारण इस पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। कुंभ राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। वहीं धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इसके अलावा मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढय्या का प्रभाव रहेगा। इन पांचों राशि के लोगों को शनि के अशुभ फल से बचने के लिए कुछ खास उपाय करने चाहिए।

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ये उपाय करें
1.
शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
2. शनि से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
3. कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
4. शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए यह मंत्र काफी प्रभावी है। शनिदेव को समर्पित इस मंत्र को श्रद्धा के साथ जपने से निश्चित रूप से आपको लाभ होगा।
सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।
मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।
5. जल में गुड़ या शक्कर मिलाकर शनिवार के दिन पीपल को जल देने और तेल का दीपक जलाने से भी शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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