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Kartik Purnima 2022: कार्तिक पूर्णिमा 7 या 8 नवंबर को, जानें किस दिन करें दीपदान?

Kartik Purnima 2022: इस बार कार्तिक पूर्णिमा को लेकर लोगों के मन में संशय बना हुआ कि ये तिथि कब है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार 7 व 8 नवंबर दोनों दिन कार्तिक पूर्णिमा का संयोग बन रहा है। 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण के कारण अधिकांश लोग 7 नवंबर को ही ये पर्व मनाएंगे।
 

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First Published Nov 7, 2022, 8:42 AM IST

उज्जैन. पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima 2022) तिथि 7 नवंबर की दोपहर 3:58 से 8 नवंबर, मंगलवार की दोपहर 3:53 बजे तक रहेगी। चूंकि देव दीपावली का पर्व कार्तिक पूर्णिमा की शाम को मनाया जाता है और ये संयोग 7 नवंबर, सोमवार को बन रहा है तो इसी दिन ये पर्व मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। 8 नवंबर, मंगलवार को चंद्र ग्रहण के बाद यानी शाम 6.19 के बाद भी दीपदान किया जा सकता है।

7 नवंबर को क्या करें?
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, 7 नवंबर, सोमवार की शाम को देव दीपावली का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। इस दिन दीपदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा से संबंधित सभी शुभ कार्य जैसे दान, हवन, पूजा आदि 7 नवंबर की शाम को किए जा सकते हैं। चूंकि इस दिन दोपहर 3:58 बाद से पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी।

8 नवंबर को क्या करें?
8 नवंबर को सुबह सूतक आरंभ होने से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान किया जा सकता है। सूतक का आरंभ सुबह लगभग 8 बजे से होगा। इसके पहले पूजन, दान आदि किए जा सकते हैं। सूतक आरंभ होने के बाद किसी भी तरह की पूजा आदि न करें। शाम को 6.19 पर ग्रहण के साथ ही सूतक भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद स्नान आदि करने के बाद दीपदान, पूजा, हवन, दान आदि करना श्रेष्ठ रहेगा। पुराणों में कार्तिक महीने के आखिरी दिन दीपदान का बहुत महत्व बताया गया है। 

कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। दीपदान से पहले दीपक की पूजा की जाती है और इसके बाद इसे नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। घर पर भी दीपदान किया जा सकता है। अग्निपुराण के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा। विद्वानों का कहना है कि पद्मपुराण में भी भगवान शिव ने भी अपने पुत्र कार्तिकेय जी को दीपदान का माहात्म्य बताया है।


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