ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहते हैं। इस तरह साल में 12 संक्रांति आती है। इस बार 14 मार्च, सोमवार की रात से सूर्य राशि बदलकर कुंभ से मीन में आ चुका है। इसलिए 15 मार्च, मंगलवार मीन संक्रांति (Meen Sankranti 2022) का पर्व मनाया जाएगा। 

उज्जैन. संक्रांति पर्व पर पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान और दान करने की परंपरा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सूर्य ज्योतिष का जनक है और ग्रहों का राजा भी। फाल्गुन मास में जब सूर्य राशि बदलता है तो साथ ही साथ ऋतु परिवर्तन भी होता है। वैसे तो सभी संक्रांतियों का विशेष महत्व होता है, लेकिन मीन संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान करने पर विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। इस दिन सुबह जल्दी से उठकर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

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ये है शुभ मुहूर्त
14 मार्च की रात लगभग 12.16 पर सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मीन संक्रांति का महापुण्य काल 15 मार्च सुबह 6. 31 से दोपहर 12 .31 तक यानी 5 घंटे रहेगा। 

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इस विधि से करें सूर्य पूजा और ये उपाय
- पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, मंगलवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहा लेना चाहिए। इससे तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है।
- इस दिन उगते हुए सूरज को प्रणाम करें। फिर अर्घ्य दें। उसके बाद धूप-दीप दिखाएं और आरती करें। आखिरी में फिर से सूर्य देवता को प्रणाम करें और 7 बाद प्रदक्षिणा करें। यानी एक ही जगह पर खड़े होकर 7 बार परिक्रमा करते हुए घूम जाएं।
- पूजा के बाद वहीं खड़े होकर श्रद्धा के मुताबिक, दान करने का संकल्प लें और दिन में जरूरतमंद लोगों को खाना और ऊनी कपड़ों का दान करें। 
- हो सके तो इस दिन व्रत भी कर सकते हैं। पूरे दिन नमक खाए बिना व्रत रखने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामना पूरी होती है।

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इन बातों का रखें ध्यान
1.
सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। थाली में लाल चंदन, लाल फूल और घी का दीपक रखें। 
2. दीपक तांबे या मिट्‌टी का हो सकता है। अर्घ्य देते वक्त लोटे के पानी में लाल चंदन मिलाएं और लाल फूल भी डालें।
3. अर्घ्य वाले पानी को जमीन पर न गिरने दें। किसी तांबे के बर्तन में ही अर्घ्य गिराएं। फिर उस पानी को किसी ऐसे पेड़-पौधे में डाल दें। 

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