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जन्म कुंडली के सातवें भाव में ग्रहों की अशुभता के कारण होता है पति-पत्नी में विवाद

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली का हर भाव यानी घर जीवन के एक विशेष रिश्ते से जुड़ा होता है। इस भाव में स्थित ग्रहों व बनने वाले शुभ-अशुभ योगों का प्रभाव उस रिश्ते पर जरूर पड़ता है। कुंडली का सातवां घर वैवाहिक जीवन से जुड़ा होता है।

The seventh house of the birth chart is related to married life
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Ujjain, First Published Oct 25, 2021, 6:30 AM IST
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उज्जैन. कुंडली में सप्तम भाव से जीवनसाथी, मूत्रांग, वैवाहिक ख़ुशियाँ, यौन संबंधी रोग, व्यापार, सट्टा, कूटनीति, सम्मान, यात्राएँ, व्यापारिक रणनीति एवं व्यक्ति की गुप्त ऊर्जा को देखा जाता है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी तथा पार्टनर के विषय का बोध कराता है। यह नैतिक, अनैतिक रिश्ते को भी दर्शाता है। शास्त्रों में मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। इनमें काम का संबंध सप्तम भाव से होता है। 

पति-पत्नी में विवाद का कारण
कुंडली के सातवें भाव में अशुभ ग्रह हों या उसके आस-पास कोई अशुभ योग बन रहे हैं तो इसका असर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन पर भी पड़ता है। स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव से उसके पति का और पुरुष की कुंडली के सप्तम भाव से उसकी पत्नी के बारे में विचार किया जाता है। दैवज्ञ आचार्य वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ लघुजातकम में कुंडली के सप्तम भाव के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। आगे जानिए अशुभ योग का इस भाव पर क्या प्रभाव पड़ता है…

1. जिस कुंडली में सप्तम स्थान में सूर्य हो तथा सप्तमेश निर्बल हो तो उस स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
2. यदि महिला कि कुंडली में सप्तम स्थान में स्थित सूर्य पर उसके शत्रु ग्रह की दृष्टि है तो इस योग में उत्पन्न स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
3. फलित ज्योतिष के अनुसार जिस स्त्री की जन्म कुंडली में लग्न में मंगल या शनि की राशि में शुक्र हो तथा सप्तम स्थान पर पाप प्रभाव हो तो ऐसी स्त्री अपने पति को छोड़कर किसी अन्य के साथ विवाह कर लेती है।
4. यदि चंद्रमा एवं शुक्र पाप ग्रहों के साथ सप्तम स्थान में हों तो पति-पत्नी गुप्त रूप से वैवाहिक संबंध तोड़ते हैं।
5. यदि निर्बल पाप ग्रह सप्तम में बैठे हों तो इस योग में उत्पन्न स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
6. जिसकी कुंडली में सप्तम स्थान में शुभ एवं पाप दोनों प्रकार के ग्रह हों तथा सप्तमेश या शुक्र निर्बल हो तो स्त्री एक पति को छोड़कर दूसरे के साथ विवाह कर लेती है।
7. यदि पुरुष की कुंडली लग्न में राहु एवं शनि हों तो व्यक्ति लोकापवाद से अपनी पत्नी का परित्याग कर देता हैं।

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