Fertilizer for flowering plants: राख सिर्फ बचे हुए कचरे से ज्यादा है अगर सही मात्रा और सही तरीके से इसे प्लांट में डाला जाए तो यह मिट्टी को पोषक तत्व, pH बैलेंस देती है। जानें इसका कैसे सही इस्तेमाल करें।
क्या आपके फ्लॉवर प्लांट्स पर अचानक कीड़े, स्लग, चींटियां या छोटे-छोटे सफेद कीट दिखने लगे हैं? महंगे केमिकल स्प्रे खरीदने से पहले एक बार फ्री में घर की लकड़ी की राख (Wood Ash) जरूर आजमाएं। यह एक फ्री, नेचुरल और असरदार तरीका है, जो सही इस्तेमाल करने पर 1 दिन के अंदर कीड़ों को कम करने में मदद करता है। राख सिर्फ खाद नहीं है, बल्कि यह पौधों के लिए पोटेशियम और कैल्शियम से भरपूर नेचुरल सप्लीमेंट भी है। सही मात्रा में डालने पर यह फूलों की ग्रोथ, रंग और मजबूती बढ़ाती है।
राख कैसे हटाती है कीड़े?
लकड़ी की राख की बनावट महीन और ड्राई होती है। जब इसे पौधों के आसपास डाला जाता है तो यह स्लग और स्नेल जैसे मुलायम कीड़ों के शरीर को सूखा देती है। चींटियां और छोटे कीट राख की परत पार नहीं कर पाते। पौधे की पत्तियों पर हल्की धूल लगाने से एफिड्स (Aphids) कम हो सकते हैं। राख की अल्कालाइन प्रकृति की वजह से कई कीट उस जगह से दूर रहने लगते हैं।
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1 दिन में असर के लिए ऐसे करें इस्तेमाल
ड्राई स्प्रिंकल मेथड: सुबह के समय गमले की मिट्टी पर पतली परत में सूखी राख छिड़क दें। खासकर तने के आसपास सर्कल बनाकर डालें। शाम तक आप देखेंगे कि स्लग और चींटियां गायब होने लगती हैं।
लीफ डस्टिंग ट्रिक: अगर पत्तियों पर छोटे कीड़े हैं, तो सूखी राख को कपड़े या छलनी से हल्के हाथ से पत्तियों पर छिड़कें। ⚠ ध्यान रखें: बहुत मोटी परत न चढ़ाएं।
राख का घोल (माइल्ड स्प्रे) : एक बाल्टी पानी में 2-3 चम्मच राख मिलाकर 24 घंटे छोड़ दें। ऊपर का साफ पानी छानकर स्प्रे करें। यह हल्का कीटनाशक और माइक्रो-न्यूट्रिएंट स्प्रे की तरह काम करता है।
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फ्लॉवर प्लांट्स को क्या फायदा होगा?
- ज्यादा फूल – पोटेशियम फ्लॉवरिंग को बढ़ाता है।
- मजबूत तना – कैल्शियम से स्टेम मजबूत होता है।
- रूट हेल्थ बेहतर – हल्की मात्रा में राख मिट्टी की क्वालिटी सुधारती है।
- गुलाब, गेंदा, गुड़हल, पेटुनिया जैसे पौधों में इसका असर जल्दी दिखता है।
किन पौधों में सावधानी रखें
राख अल्कालाइन होती है, इसलिए जिन पौधों को एसिडिक मिट्टी पसंद है (जैसे ब्लूबेरी, अज़ेलिया) उनमें न डालें। ज्यादा मात्रा में डालने से मिट्टी का pH बिगड़ सकता है। हर 30-40 दिन में एक बार से ज्यादा उपयोग न करें।
