Vegetable Seeds Identification: हाइब्रिड या देसी सब्जियों के बीज की पहचान कैसे करें? जानें बीज के पैकेट, वैरायटी और अन्य आसान संकेतों से दोनों में अंतर करने का सही तरीका।
जब भी नर्सरी से बीज खरीदे जाते हैं तो मन में डर रहता है कि कहीं यह हाइब्रिड ना हो। घर की क्यारी, गमले या किचन गार्डन में सब्जियां उगाने का शौक है, तो आपको बीजों की समझ रखना भी बेहद जरूरी है। कई बार पैकेट पर जानकारी समझना मुश्किल हो जाता है और घर पर गलत बीज आ जाते हैं। केवल बीज को देखकर ही 100 फीसदी पहचानना मुश्किल है कि वह हाइब्रिड होंगे या फिर देसी। जानते हैं कौन-कौन से टिप्स हैं, जिससे असली बीच और हाइब्रिड बीज पहचान सकते हैं।
बीज के पैकेट पर देखें जानकारी
हाइब्रिड और देसी बीच को पहचानने का सबसे सही तरीका होता है पैकेट पर लिखी जानकारी। हाइब्रिड बीजों के पैकेट पर अक्सर हाइब्रिड, F1 या F1 हाइब्रिड लिखा होता है। वही देसी या फिर पारंपरिक किस्म के बीजों पर संबंधित वैरायटी का नाम लिखा होता है। आप इसे पढ़कर ही बीज खरीदें।
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भरोसेमंद नर्सरी से खरीदें बीज
जो भी सब्जियों के बीज मार्केट से खरीदने जाएं, तो भरोसेमंद नर्सरी से ही बीज खरीदें। बीज के पैकेट पर कंपनी का नाम, किस्म, बैच नंबर भी चेक करें। पैकिंग डेट के साथ उसकी वैधता भी देखें। खरीदारी के समय सील बंद पैकेट लेना बहुत जरूरी है। गलत या पुराना बीज बिल्कुल ना लें।
देसी बीजों का करें दोबारा इस्तेमाल
अगर आपके घर में देसी सब्जियों या फल लगे हैं, तो आप उनके बीजों को संभाल कर रख सकते हैं। यह अगली फसल में काम आते हैं लेकिन F1 हाइब्रिड पौधे से निकले बीज अगली पीढ़ी में वही गुण बनाए नहीं रखते हैं। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि अगर बीज को संरक्षित करके रख रहे हैं, तो उसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है।
हाइब्रिड और देसी बीज में मुख्य अंतर
पारंपरिक बीज या देसी बीज ओपन-पॉलिनेटेड किस्मों से बीज बचाकर दोबारा उगाए जा सकते हैं। जबकि F1 पौधों से मिले बीज अगली पीढ़ी में ठीक वैसी ही फसल उगाएं, ये बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता है। क्षेत्र और किस्म के अनुसार देसी बीजों के नाम थोड़े अलग हो सकते हैं।
