Monotropic Diet Health Effect: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा इन दिनों मोनोट्रॉपिक डाइट को लेकर चर्चा में हैं। लेकिन सी लिमिटेड डाइट को लंबे दौर तक लेना अच्छा है या बुरा?

सेलेब्रिटी डाइट्स पर अक्सर चर्चा होती है और हाल में अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली ने मोनोट्रॉपिक डाइट को अपनाया है। लेकिन यह दावा किया जा रहा है कि यह डाइट लंबे टाइम के लिए टिकाऊ नहीं है और हेल्थ को भी नुकसान पहुंचा सकती है। मोनोट्रॉपिक डाइट का मतलब ऐसी डाइट से है जिसमें एक ही टाइप का भोजन (या बहुत सीमित फूड आइटम) लगातार लिया जाता है। जैसे कि केवल एक फल, एक तरह की सब्जी या कुछ चने, अनाज आदि। इस तरह की डाइट टेंपरेरी यानि शॉर्ट टर्म गोल के लिए हो सकती है, लेकिन यदि इसे लंबे समय तक अपनाया जाए, तो यह कुछ रिस्क भी लेकर आती है।

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मोनोट्रॉपिक डाइट के फायदे

मोनोट्रॉपिक डाइट अपनाने के पीछे कुछ फायदों की भी चर्चा हो रही है। जैसे खाने की वैराइटी कम होती है, इसके मील प्लान करना आसान लगता है। इससे फास्ट वेट लॉस होता है क्योंकि कैलोरी लिमिटेड रहती है। साथ ही कम तैयारी और कम खाना बदलने की जरूरत होने से समय बचता है। इतना ही नहीं बॉडी भी आसानी से डिटॉक्स हो जाती है लेकिन इन वादों के पीछे छिपे जोखिमों को समझना जरूरी है।

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मोनोट्रॉपिक डाइट क्यों टिकाऊ नहीं? 

न्यूट्रीशन में इंबैलेंस होना : जब आप लगातार एक ही तरह का भोजन लें, तो माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स) की कमी हो सकती है। हमारे शरीर को विटामिन A, C, D, B-कॉम्प्लेक्स, आयरन, ज़िंक, मैग्नीशियम जैसे तत्वों की जरूरत होती है और सिर्फ एक प्रकार के फल या अनाज में ये सभी नहीं होते।

मांसपेशियों के लिए लॉस: पर्याप्त प्रोटीन न मिलने पर मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

इम्यून सिस्टम कमजोर होना: इस डाइट में कई तरह का पोषण न मिलने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट सकती है।

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हार्मोन असंतुलन: खासकर महिलाओं में मेनोपॉज, मासिक धर्म या प्रजनन गेल्थ पर इफेक्ट पड़ता है। जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाए।

माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी: जैसे आयरन, कैल्शियम, विटामिन D, B12 आदि की कमी से एनीमिया, हड्डियों में कमजोरी आदि हो सकते हैं।

क्या मोनोट्रॉपिक डाइट सेफ हो सकती है?

कुछ सीमित अवधि (1–3 दिन) के लिए ऐसी डाइट की कोशिश करना संभव है, पर उसे डाइटिंग चैलेंज या क्लीनस की तरह ले जाना चाहिए, न कि लंबी लाइफस्टाइल के तौर पर। अगर इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि आप हाइड्रेशन अच्छी रखें, विटामिन-सप्लीमेंट्स लें और शरीर के बदलाव पर निगरानी रखें तो सीमित अवधि में जोखिम कम किया जा सकता है।