इंदौर से एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक पिता ने अपने फूल से बेटा-बेटी और पत्नी को मार डाला। इसके बाद खुद ने भी सुसाइड कर लिया। जबिक एक दिन पहले वह परिवार की सलामती के लिए उज्जैन बाबा महाकाल के मंदिर गया था।

इंदौर. हर पिता अपने बच्चों की बेहतर जिंदगी के लिए दिन रात मेहनत करता है। यहां तक की उनका करियर बनाने के लिए घर गिरवी रखकर बैंक से लोन तक लेता है। लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। जहां एक मजबूर बाप ने लोन नहीं चुकाने की वजह से अपना हसंता-खेलता परिवार ही खत्म कर दिया। अंत में खुद ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। जिन हाथों से वह कल तक अपने फूल से बेटा और बेटी को गोद में खिलाता था, अब उन्हीं हाथों से मासूमों को उसने जहर देकर मार डाला।

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एक दिन पहले परिवार की सलामती के लिए गया था महाकाल मंदिर
मृतक अमित यादव घटना से एक दिन पहले उज्जैन बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए गया था। जहां वो पूरे परिवार के साथ महाकाल की शाही सवारी में शामिल हुआ था। यहां उसने अपने परिवार की सलामती के लिए दुआ मांगी थी। लेकिन घर लौटकर उसने दूसरे दिन पहले अपनी पत्नी टीना यादव और तीन साल की बेटी याना व डेढ़ साल के बेटे दिव्यांश को कांपते हाथों से जहर दे दिया। फिर खुद ने भी आत्महत्या कर ली। घटना का पता उस वस्त चला जब मकाल मालिक ने दरवाजा खटकटाया, लेकिन जब दरवाजा नहीं खुला तो उसे कुछ अनहोनि की आशंका हुई। इसके बाद पुलिस को सूचित कर बुलाया तो पूरा परिवार खत्म हो चुका था। पत्नी और बच्चे बिस्तर पर पड़े थे, जबकि युवक का शव फंदे से लटका था।

सुसाइड नोट में लिख गया परिवार के मरने की वजह
मौके पर पहुंची पुलिस को चारों के शवों के साथ एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसे मरने से पहले अमित यादव ने लिखा है। सुसाइड नोट के मुताबिक, अमित यादव ने मोबीक्विक ऐप के जरिए लोन लिया था। जिसे वह चुका नहीं पा रहा था। वह आर्थिक रूप से परेशान चल रहा था। किस्त नहीं भर पाने के दबाव में पूरा परिवार खत्म हो गया। फिलहाल पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। साथ ही लोन देने वाली कंपनियों के कर्मचाारियों से भी पूछताछ होगी।

मां ने जब फोन किया तो खत्म हो चुका था पूरा परिवार
बता दें कि मृतक अमित यादव मूल रूप से सागर का रहने वाला था। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भागीरतपुर में किराए से रहता था। अमित मोबाइल टावर कंपनी में इलेक्ट्रिक इंजीनियर था। घटना वाले दिन अमित की मां ने उसे फोन किया, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया तो मां ने अमित के मालिक केदरानाथ को फोन कर बेटे से बात कराने को कहा। जब मकान मालिक वहां पहुंचे तो दरवाजा बंद था, इसके बाद उन्होंने आवाज लगाई फिर भी गेट नहीं खुला। इसके बाद पुलिस को सूचित कर बुलाया गया।

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