अपनी लड़ाकू क्षमताओं में वृद्धि के उद्देश्य के साथ थल सेना अगले कुछ वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल शुरू कर सकती है।

हिसार (Haryana). अपनी लड़ाकू क्षमताओं में वृद्धि के उद्देश्य के साथ थल सेना अगले कुछ वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल शुरू कर सकती है। सेना के एक शीर्ष कमांडर ने यह जानकारी दी।

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दक्षिण पश्चिमी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आलोक सिंह क्लेर ने बुधवार को यहां सैन्य स्टेशन में एआई पर आयोजित एक सेमिनार से इतर कहा कि जमीन से अंतरिक्ष तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेना को हर क्षेत्र में मदद करेगी। सैन्य उपयोग और यंत्रीकृत बलों के लिए एआई का उपयोग करने की खातिर सेना को पूरी तरह से नेटवर्क-केंद्रित बनना होगा।

जयपुर स्थित 'सप्त शक्ति' के कमांडर ने कहा, "सेना जल्द ही अगले दो-तीन वर्षों में रचनात्मक और विघटनकारी उपयोग के लिए एआई को शामिल कर सकती है, और इसका उपयोग सबसे पहले यंत्रीकृत बल करेगा।"

क्लेर ने कहा कि सेमिनार युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक "बड़ा कदम" है। दक्षिणी पश्चिमी कमान 'सप्त शक्ति' द्वारा एआई पर आयोजित सेमिनार में उद्योग व इस क्षेत्र के विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं।

[यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है]