राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सरकार खेलों को प्रमोट करने के लिए जो भो हो सकता है करेगी। चाहे कोई संस्थान हो या कोई व्यक्तिगत स्तर पर प्रैक्टिस करना चाहता हो, सरकार उसे हरसंभव मदद देगी।

नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा को इंडियन आर्मी में बड़ा सम्मान दिया गया है। पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) का नाम अब सूबेदार नीरज चोपड़ा स्टेडियम होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पुणे में सेना के खेल संस्थान में टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के नाम पर एक स्टेडियम का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवने और नीरज चोपड़ा भी मौजूद थे।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सरकार खेलों को प्रमोट करने के लिए जो भो हो सकता है करेगी। चाहे कोई संस्थान हो या कोई व्यक्तिगत स्तर पर प्रैक्टिस करना चाहता हो, सरकार उसे हरसंभव मदद देगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (एएसआई) का नाम अब नीरज चोपड़ा के नाम पर कर दिया गया है। इस दौरान उन्होंने उनके भविष्य के सभी प्रयासों में सफलता की कामना भी की।

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इस दौरान उन्होंने कहा- वह सभी ओलंपियन, जो थोड़े से मार्जिन से चौथे स्थान पर रह गए या फाइनल में पहुंचे लेकिन पदक नहीं पा सके। मेरे लिए वो सभी किसी विनर, किसी पदक विजेता से कम नहीं है। आपने ओलंपिक में हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया यह कोई कम गौरव की बात नहीं है। मेरा यह सपना है कि हम एक खेल प्रधान देश बने जो ओलंपिक में टॉप देशों की श्रेणी में आए। मैं उम्मीद करता हूं कि आप सब इसमें मेरा साथ अवश्य देंगे। मैं उस पल के लिए भी स्वप्न देख रहा हूँ, जब भारत को ओलंपिक का आयोजन करने का मौका मिलेगा।

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यह हमारे लिए भी गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्वयं खेल में रूचि लेते हैं, यह उनके नेतृत्व में हमारी सरकार का खेल और हमारे खिलाड़ियों के प्रति स्नेह और प्रतिबद्धता दर्शाता है। किसी भी एथलीट के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्षण वो होता है जब वह तिरंगा पकड़ता है। मैं समझता हूँ की जब सूबेदार नीरज चोपड़ा को स्वर्ण पदक देते हुए जब टोक्यो में राष्ट्र गान बजा, तब एक-एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा और आँखें ख़ुशी से नम हो गई थी। 

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों की स्पर्धा में क्वालिटी बढ़ाने का प्रयास किया है। मैं समझता हूं ये केवल सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसे हमें और आगे लेकर जाना है। हमें अभी इन प्रयासों से सफलता के और नए आयाम हासिल करने हैं।