बेंगलुरु में एक कैब ड्राइवर ने रोज-रोज के झगड़े से तंग आकर छोटे भाई धनराज की पहले से प्लान की गई हत्या कर डाली। CCTV में लाश फेंकने का फुटेज मिला, जिससे तीनों आरोपी पकड़ लिए गए। क्या यह सिर्फ पारिवारिक तनाव था या  कोई और गहरी, अनकही दुश्मनी थी? 

Bengaluru Murder: बेंगलुरु में सामने आया एक ऐसा मर्डर केस जिसने पुलिस से लेकर इलाके के लोगों तक सभी को चौंका दिया। एक कैब ड्राइवर, जो रोज़ शहर की भीड़ में लोगों को गंतव्य तक पहुंचाता था, उसने अपने ही छोटे भाई का गला चाकू से काटकर उसकी जान ले ली। लेकिन इस हत्या के पीछे जो वजह सामने आई, वह किसी भी परिवार के लिए डराने वाली है—सालों से घरेलू हिंसा, गाली-गलौज, चोरी, और घर में लगातार तनाव। कहा जा रहा है कि यह हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि पहले से प्लान की गई थी, और इसका खुलासा तब हुआ जब CCTV फुटेज सामने आया।

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क्या यह सिर्फ घरेलू झगड़ा था, या पहले से तय मर्डर प्लान?

शुरुआत 6 नवंबर को हुई, जब बेंगलुरु के बाहरी इलाके बन्नेरघट्टा–कग्गलीपुरा रोड पर सड़क किनारे एक सड़ी-गली लाश मिली। शरीर पर चोट के निशान नहीं थे, इसलिए पुलिस को शक था कि यह शायद कोई एक्सीडेंटल या नेचुरल मौत हो सकती है। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। कुछ ही घंटों बाद पास की एक निजी कंपनी का CCTV फुटेज सामने आया, जिसमें एक कार दिखाई देती है। कार रुकती है, दो लोग उतरकर एक बॉडी को सड़क से नीचे धक्का देते हैं और तेजी से भाग जाते हैं। बस यही फुटेज इस केस की पूरी दिशा बदल देता है।

धनराज कौन था? क्यों बढ़ रहा था घर में तनाव?

पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि 24 साल का धनराज लंबे समय से हिंसक व्यवहार करता था। परिवार पर हमला करना, चोरी करना, पड़ोसियों से लड़ाई करना और शराब पीकर हंगामा करना उसकी आदत बन गई थी। उसके बड़े भाई 28 साल के शिवराज, जो HSR लेआउट में कैब चलाता था, कई सालों से यह सब झेल रहा था। धनराज कई बार भाई पर हमला कर चुका था। घर में रोज होने वाली इस उथल-पुथल का असर सबसे ज़्यादा शिवराज पर पड़ा, जो बेंगलुरु में कैब ड्राइवर का काम करता था। पुलिस ने बताया कि भाई की हरकतों से परेशान होकर वह “टूटने की हद तक” पहुंच गया था।

कैसे प्लान हुई हत्या? नौकरी का ऑफर बना चारा

2 नवंबर को शिवराज ने अपने छोटे भाई धनराज को फोन किया और कहा कि वह उसे नौकरी दिलवाएगा। धनराज बिना शक के बेंगलुरु आ गया। बन्नेरघट्टा–NICE रोड पर शिवराज अपनी कार लेकर पहुंचा, साथ में उसके दोस्त संदीप (24) और प्रशांत (26) भी थे। धनराज आगे की सीट पर बैठा फोन स्क्रॉल करने लगा, तभी पीछे बैठे दोनों दोस्तों ने उसे पकड़ा और उसी समय शिवराज ने उसकी गर्दन पर चाकू से वार कर दिया। कुछ ही सेकंड में कार के अंदर उसकी मौत हो गई।

लाश को कहां फेंका गया? हथियार कैसे गायब किए गए?

हत्या के बाद लाश को बन्नेरघट्टा–कग्गलीपुरा रोड किनारे फेंक दिया गया। चाकू और खून से भरा कार मैट इलेक्ट्रॉनिक सिटी–NICE रोड के पास फेंक दिया। कार को साफ किया गया और मामला छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन CCTV ने सबका खेल बिगाड़ दिया।

लाश फेंकने का सच कैसे आया सामने?

हत्या के बाद तीनों आरोपी कार लेकर एक सुनसान जगह पहुंचे। बन्नेरघट्टा–कग्गलीपुरा रोड पर लाश फेंक दी। खून वाले फ्लोर मैट और चाकू को NICE रोड के पास फेंककर सबूत मिटाने की कोशिश की। 6 नवंबर को पुलिस को सड़क किनारे एक सड़ी-गली लाश मिली। शुरू में यह मौत एक्सीडेंट जैसी लगी क्योंकि कोई बाहरी चोट नजर नहीं आई। लेकिन फिर सामने आया CCTV फुटेज में एक कार रुकती है, दो लोग नीचे उतरते हैं, और एक बॉडी को सड़क किनारे धक्का देकर भाग जाते हैं। यही वीडियो केस का टर्निंग पॉइंट बना।

पुलिस ने कैसे पकड़ा पूरा गैंग?

जांच के दौरान पुलिस को CCTV फुटेज से जिस कार का नंबर मिला, उसका मालिक शिवराज निकला। लोकेशन रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा मैच हुआ। उसके बाद शिवराज और उसके दोंनो साथयों को हिरासत में लिया गया। चाकू और मैट भी बरामद कर लिए गए। अब तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।