वडोदरा में तीन दिवसीय भारत CPSE कॉन्क्लेव 2026 का समापन हुआ। इसका आयोजन क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने किया। इसमें ऊर्जा और खनन क्षेत्रों के CPSE के लिए प्रोजेक्ट और एसेट मैनेजमेंट को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।
नई दिल्ली [भारत], 26 जुलाई (एएनआई): प्रोजेक्ट और एसेट मैनेजमेंट पर तीन दिवसीय भारत CPSEs के सलाहकार कॉन्क्लेव 2026 का तीसरा संस्करण गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) वडोदरा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें ऊर्जा और खनन क्षेत्रों के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSEs) में परियोजना निष्पादन, संपत्ति प्रबंधन और संगठनात्मक उत्कृष्टता को मजबूत करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
रेल मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था, जिसमें गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) रणनीतिक ज्ञान भागीदार के रूप में शामिल था। इस कॉन्क्लेव में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों के साथ-साथ वरिष्ठ CPSE अधिकारियों ने भाग लिया, ताकि वे सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान कर सकें और विकसित भारत 2047 के समर्थन में आगे का मार्ग प्रशस्त कर सकें।
सम्मेलन के मुख्य विषय और चर्चा
इसमें योजना, डीपीआर, अनुबंध, भूमि अधिग्रहण, संपत्ति जीवन चक्र प्रबंधन, डीप टेक टेक्नोलॉजी अपनाने और एक कार्यान्वयन योग्य CPSE सुधार एजेंडा तैयार करने में पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल
कॉन्क्लेव में एनटीपीसी, कोल इंडिया, भारत कोकिंग कोल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, ओएनजीसी विदेश, ऑयल इंडिया, एमआरपीएल, गेल, सेल, मेकॉन, एनएमडीसी, हिंदुस्तान कॉपर, नाल्को, एनएचपीसी, एसजेवीएन और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कुल 39 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों के विचार
उद्घाटन के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. मंगू सिंह (पूर्व एमडी, डीएमआरसी) ने परियोजनाओं की सफलता के लिए अनुबंध प्रबंधन को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। सम्मानित अतिथि श्री के. मोसेस चलाई (सचिव, DPE) ने संपत्ति और परियोजना प्रबंधन के लिए अभिनव और डेटा-संचालित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा
समापन सत्र को संबोधित करते हुए, GSV के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने कहा कि कॉन्क्लेव ने सहयोगात्मक शिक्षा के लिए एक मजबूत गति पैदा की है और सूचित व डेटा-संचालित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। उन्होंने रेलवे, राजमार्ग, विमानन, समुद्री, लॉजिस्टिक्स और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में क्षमता निर्माण में GSV के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला। GSV और CBC के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लेख करते हुए, उन्होंने दोहराया कि यह कार्यक्रम एक दीर्घकालिक CBC-GSV साझेदारी की निरंतरता का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे के पारिस्थितिकी तंत्र में पेशेवर क्षमता को मजबूत करना है।
समापन भाषण देते हुए, डॉ. अलका मित्तल, सदस्य (प्रशासन, CBC) ने वक्ताओं, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और CPSE प्रतिभागियों के बीच हुए स्पष्ट विचार-विमर्श पर संतोष व्यक्त किया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि कुछ परियोजनाएं देर से क्यों चलती हैं और संस्कृति, अनुशासन, नीतिगत सक्षमता और प्रौद्योगिकी उन्हें कैसे सही कर सकती है। उन्होंने दोहराया कि CBC, GSV के साथ मिलकर, इस कार्यक्रम में उभरी सिफारिशों के आधार पर सर्वोत्तम प्रथाओं का एक भारत CPSE संग्रह प्रकाशित करेगा। डॉ. अलका मित्तल ने कुलपति प्रो. मनोज चौधरी और प्रो. कौशिक दास के मार्गदर्शन में ज्ञान भागीदार के रूप में GSV द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और इस कार्यक्रम को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लिए बुनियादी ढांचे की क्षमता निर्माण की दिशा में CBC और GSV के बीच सहयोगात्मक प्रयासों को जारी रखने की उत्सुकता व्यक्त की। (एएनआई)
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