कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में 21 अक्टूबर के बाद हम 20 लाख टन कोयले की आपूर्ति करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि जरूरत के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराया जाएगा।

नई दिल्ली। कोयला रिजर्व (Coal reserve crisis) में कमी से उत्पन्न हुए संकट के बीच एक बार फिर केंद्र सरकार ने सबकुछ ठीक होने का दावा किया है। केंद्रीय कोयला मंत्री (Union Coal Minsiter) प्रह्लाद जोशी (Prahlad Joshi) ने कहा कि देश में कोयला की कोई कमी नहीं है। कोयले की रिकार्ड आपूर्ति हुई है। कोल इंडिया और कोयला मंत्रालय देश में कोयला की मांग को पूरा करने में पूर्णरूप से सक्षम हैं।

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देश के कई राज्यों में कोयला की कमी की वजह से ब्लैकआउट के अंदेशों के बीच सोमवार को कोयला मंत्री जोशी ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड के पास वर्तमान में कोयले का 22 दिनों का स्टॉक है। कल 1.95 लाख टन कोयले की आपूर्ति की गई जो अब तक का रिकॉर्ड है। हम कोयले की आपूर्ति को तेज गति से बढ़ाना जारी रखेंगे। हमें उम्मीद है कि मानसून खत्म होने के बाद कोयले की आपूर्ति में तेजी से सुधार होगा।

21 अक्तूबर के बाद 20 लाख टन कोयले की आपूर्ति 

कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में 21 अक्टूबर के बाद हम 20 लाख टन कोयले की आपूर्ति करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि जरूरत के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराया जाएगा।

मंत्री के दावों के बावजूद अमित शाह ने संभाली कमान

देश में कोयला संकट से उत्पन्न स्थितियों के बावजूद केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी लगातार कोयला रिजर्व का दावा कर रहे हैं। लेकिन उनके दावों के बावजूद स्थितियां बिगड़ने का अंदेशा होते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को इस मोर्चे पर कमान संभाली। उन्होंने केंद्रीय कोयला मंत्री, उनके मंत्रालय के अधिकारियों, केंद्रीय उर्जा मंत्री, उनके मंत्रालय के अधिकारियों व एनटीपीसी के टॉप लेवल के साथ मीटिंग कर मंथन किया और आवश्यक निर्देश दिए। 

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देश के कई राज्यों में ब्लैकआउट का अंदेशा

दरअसल, देश में कोयला के संकट (coal reserve crisis) से ब्लैकआउट का खतरा मंडराने लगा है। कोविड-19 महामारी के बाद फिर से इंडस्ट्रीज खुल रहे हैं। ऐसे में बिजली की खपत बढ़ी है तो कोयले की मांग भी बढ़ रही है। उधर, कोयला आधारित थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होता जा रहा है। ऐसे में कोयले की कमी से बिजली प्रोडक्शन पर बड़ा असर पड़ रहा। क्योंकि 70 प्रतिशत बिजली का प्रोडक्शन कोयला से ही होता है। आज की तारीख में हालात यह है कि कहीं तीन दिन का कोयला बचा है तो कहीं दो दिन का। ऐसे में अगर कोयला की कमी पूरी नहीं हुई तो पूरे देश को ब्लैकआउट का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली सरकार ने भी चेताया

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को कहा कि अधिकांश बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी है। बिजली संयंत्रों में केवल केवल 2-3 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक बचा है। एनटीपीसी ने अपने संयंत्रों की उत्पादन क्षमता को 50 से 55% तक सीमित कर दिया है। पहले 4000 मेगावाट बिजली मिलती थी, लेकिन अब आधी भी बिजली नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसी भी पावर प्लांट में पंद्रह दिन से कम का स्टॉक नहीं होना चाहिए। लेकिन स्थितियां उलट हैं। अब अगर स्थितियों को नहीं संभाला गया तो वह बिगड़ सकती हैं।

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उर्जा मंत्री ने उर्जा कंपनियों को ही दे दी थी चेतावी

केंद्रीय उर्जा मंत्री (Union Power Minister)आरके सिंह (R K Singh) ने रविवार को कहा था कि देश में वास्तव में न तो कोई संकट है ना ही कोई संकट था। यह अनावश्यक रूप से बढ़ा चढ़ाकर बताया जा रहा है। केंद्रीय उर्जा मंत्री ने गेल (GAIL) और टाटा पॉवर (Tata Power) के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर सख्त ऐतराज जताया था। 

दिल्ली में डिस्कॉम की मीटिंग के बाद केंद्रीय उर्जा मंत्री आरके सिंह ने बताया कि हमारे पास औसत कोयला भंडार (पावर स्टेशनों पर) है जो 4 दिनों से अधिक समय तक चल सकता है। स्टॉक हर दिन भर दिया जाता है। आरके सिंह ने टाटा पॉवर और गेल के अधिकारियों पर चेतावनी दी साथ ही एसएमएस भेजकर दहशत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वास्तव में न तो कोई संकट था और न ही कोई संकट था। यह अनावश्यक रूप से बनाया गया था। उन्होंने टाटा पावर के सीईओ को चेतावनी दी है यदि वे ग्राहकों को आधारहीन एसएमएस भेजते हैं जो दहशत पैदा कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गेल और टाटा पावर के संदेश गैर-जिम्मेदाराना है।

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