बैंड, बाजा और बारात के बाद सीधा 'इमरजेंसी एग्जिट'! 3 राज्यों में अकेले पुरुषों को शिकार बनाने वाले 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का खौफनाक पर्दाफाश। कोटा पुलिस ने दबोचे 8 शातिर ठग, घूंघट के पीछे छिपा था पहले से शादीशुदा होने का राज!

कोटा: शानदार शादी का मंडप, गूंजती शहनाइयां, बैंड-बाजे की धुन, चेहरे पर शर्म का घूंघट लिए बैठी दुल्हन और अपनी नई जिंदगी के हसीन सपने बुनता एक दूल्हा। पहली नजर में यह किसी आम भारतीय शादी की खूबसूरत तस्वीर लगती है, लेकिन इसके पीछे छिपी थी एक ऐसी खौफनाक साजिश, जो सीधे किसी बड़ी थ्रिलर फिल्म की पटकथा को मात देती है। कोटा पुलिस ने 'ऑपरेशन क्रिमिनल डस्टिंग' के तहत एक ऐसे ही हाई-प्रोफाइल और शातिर 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसके तार तीन राज्यों में फैले हुए थे। इस गैंग के आठ शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर पुलिस ने शादी के नाम पर चल रहे एक बहुत बड़े बिजनेस मॉडल का अंत किया है।

दलालों का जाल और लाखों की 'मैचमेकिंग फीस' का रहस्य

इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद सधा हुआ और पेशेवर था। कोटा के रामगंज मंडी से लेकर झारखंड के धनबाद तक फैले इस गैंग के बिचौलिए (ब्रोकर्स) समाज के ऐसे कमजोर, अकेले या उम्रदराज कुंवारे पुरुषों को ढूंढते थे, जिन्हें लंबे समय से जीवनसाथी की तलाश थी। ये चिकनी-चुपड़ी बातें करने वाले दलाल पीड़ित को झांसा देते थे कि वे उनके लिए एक 'परफेक्ट' दुल्हन ढूंढ कर देंगे। लेकिन इस सुखद भविष्य के वादे की एक बड़ी कीमत होती थी-तथाकथित 'मैचमेकिंग फीस' के रूप में ₹1 लाख से ₹2 लाख तक की नकदी। शादी के लिए बेताब ये पुरुष बिना किसी संदेह के अपनी गाढ़ी कमाई इन दलालों के हाथों में सौंप देते थे, इस बात से बिल्कुल अनजान कि वे खुद अपने लिए एक जाल खरीद रहे हैं।

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घूंघट के पीछे का सच: पहले से शादीशुदा 'नकली दुल्हनें'

जब पैसे की बात तय हो जाती, तब एंट्री होती थी 'शरमाती हुई दुल्हन' की। लेकिन इस खेल का सबसे चौंकाने वाला और घिनौना पहलू यह था कि पीड़ितों से जिन लड़कियों को मिलवाया जाता था, वे कुंवारी नहीं बल्कि पहले से शादीशुदा होती थीं। वे इस गिरोह की सक्रिय सदस्य थीं, जिनका काम सिर्फ शादी का नाटक करना था। जैसे ही एक भव्य, ड्रामा से भरपूर शादी का आयोजन संपन्न होता और मोटी रकम हाथ बदलती, गैंग के सदस्य उस पैसे को आपस में बराबर-बराबर बांट लेते थे। असली खेल तो विदाई के बाद शुरू होता था, जब दुल्हन अपने नए ससुराल पहुंचती थी।

वो 'कोरियोग्राफ्ड एग्जिट': एक झूठी कॉल और हमेशा के लिए गायब

शादी के महज़ कुछ ही दिन बीतते थे कि नई-नवेली दुल्हन के चेहरे से मासूमियत का नकाब उतर जाता था। अचानक एक दिन वह एक सोची-समझी 'फैमिली इमरजेंसी' का बहाना बनाती। कभी माता-पिता की अचानक गंभीर बीमारी तो कभी किसी बड़े हादसे का हवाला देकर वह रोने-धोने का नाटक करती। दुखी और चिंतित दूल्हा अपनी पत्नी की बात पर भरोसा कर उसे विदा कर देता था। लेकिन यह विदाई आखिरी साबित होती थी। वह दुल्हन कभी वापस नहीं लौटती थी। पीछे छूट जाता था एक हैरान-परेशान दूल्हा, एक खाली घर और ठगा गया अहसास। समाज में बदनामी और शर्मिंदगी के डर से कई पीड़ित तो शुरुआत में पुलिस के पास जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते थे।

3 राज्यों में बिछा जाल: कैसे हुआ 'मास्टरमाइंड्स' का अंत?

इस गिरोह का अंत तब शुरू हुआ जब 13 और 16 जुलाई को दो ठगे गए दूल्हों ने हिम्मत जुटाई और कोटा ग्रामीण के रामगंज मंडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। कोटा के पुलिस अधीक्षक (SP) सुजीत शंकर और एएसपी रामकल्याण मीणा की अगुवाई में पुलिस ने एक विशेष जाल बुना। पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के चौंकाने वाले लॉजिस्टिक्स का खुलासा हुआ। पुलिस ने झारखंड के धनबाद से लाली कुमारी, कुमारी, पूनम बाग, सुधीर कुमार और रोहित बाग को दबोचा। वहीं झालावाड़ से भूरा लाल की गिरफ्तारी ने इस गैंग के स्थानीय कनेक्शन को उजागर किया। इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और मध्य प्रदेश के राजगढ़ से सुरेश कुमार तथा बिहार के औरंगाबाद से रूपेश कुमार को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।

5 शिकार और लाखों की ठगी: क्या अभी कई और राज खुलने बाकी हैं?

पूछताछ के दौरान इस शातिर गैंग ने कबूल किया है कि वे अब तक राजस्थान और मध्य प्रदेश में कम से कम पांच पुरुषों को अपना शिकार बना चुके हैं। इनमें सुरेश पाटीदार से ₹1 लाख, दीपक मीणा से ₹1 लाख, टिंकू सिंह से ₹1.10 लाख, सत्यनारायण से ₹1.50 लाख और धनराज नाई से ₹1.10 लाख की मोटी रकम ऐंठना शामिल है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल सभी संदिग्ध पुलिस रिमांड पर हैं और उनके बैंक खातों व वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गैंग के वैवाहिक जाल में कई और मासूम लोग भी फंसे हो सकते हैं, जिनके राज उगलवाने के लिए पूछताछ जारी है।