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CSIR 80th Establishment day: उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू बोले-वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान दें

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 80वें स्थापना दिवस समारोह में उपराष्ट्रपति एम.वैंकैया नायडू ने कहा कि विज्ञान के उच्चतम आर्डर के अनुसरण के लिए फिर से खुद को खोजना और भविष्यवादी बनना होगा। 

CSIR 80th Establishment day Programme, Venkaiah Naidu advised CSIR to reinvent itself and turn futuristic while pursuing the science of the highest order
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New Delhi, First Published Sep 26, 2021, 3:01 PM IST
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नई दिल्ली। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के 80वें स्थापना दिवस समारोह में उपराष्ट्रपति एम.वैंकैया नायडू (M.Venkaiah Naidu) ने कहा कि विज्ञान के उच्चतम आर्डर के अनुसरण के लिए फिर से खुद को खोजना और भविष्यवादी बनना होगा। सीएसआईआर को कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि देश के किसानों को लाभ मिल सके।

कार्यक्रम के प्रारंभ में उप राष्ट्रपति नायडू (Vice President Of India) ने समारोह का शुभारंभ उपराष्ट्रपति ने स्कूली बच्चों के लिए सीएसआईआर इनोवेशन अवार्ड, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार सहित विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं की सराहना करते हुए उनके भविष्य की चिंताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर प्रयोगशालाएं और संस्थान उन चुनौतियों का समाधान करें जिनके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान की आवश्यकता होती है। 

कृषि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

श्री नायडू ने कहा कि सीएसआईआर कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान दे और किसानों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए नए नवाचारों, तकनीकों और समाधानों के साथ आए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, दवा प्रतिरोध, प्रदूषण, महामारी और महामारी के प्रकोप का हवाला दिया, जिन चुनौतियों पर वैज्ञानिक समुदाय को ध्यान देने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि कोविड​​​​-19 महामारी सिर्फ एक अप्रत्याशित संकट है और कई चुनौतियां हैं। सीएसआईआर जैसे संस्थानों को किसी भी अचानक और अप्रत्याशित समस्या से निपटने के लिए कमर कसने की जरूरत है। सीएसआईआर की प्रत्येक प्रयोगशाला को नई अनुसंधान परियोजनाओं पर एक स्पष्ट रोडमैप के साथ आना चाहिए जो विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने और मानवता के बड़े हित में योगदान करने की कोशिश करती है।

हमें भारत में ही नहीं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि वह चाहते हैं कि सीएसआईआर और सभी विज्ञान विभाग विचार-मंथन करें और अगले दस वर्षों में आवश्यक विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचारों का एक ब्लू प्रिंट लेकर आएं, यदि हमें विश्व स्तर पर होना है प्रतिस्पर्धी। मंत्री ने कहा कि हमें अपनी महत्वाकांक्षा को भारत में सर्वश्रेष्ठ होने तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्कूली बच्चों के लिए सीएसआईआर इनोवेशन अवार्ड के विजेताओं के बीच नवाचार की शक्ति को देखकर वह वास्तव में प्रसन्न हैं और उन्होंने कहा कि वे भविष्य के उद्यमी, उद्योग के नेता, वैज्ञानिक और प्रोफेसर होंगे।

इस अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, श्री विजय राघवन, महानिदेशक सीएसआईआर, शेखर सी मांडे और श्री अंजन रे, प्रमुख, सीएसआईआर-एचआरडीजी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शोधकर्ता और पुरस्कार विजेता उपस्थित थे।

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