लोकल को मुंबई की लाइफलाइन क्यों कहते हैं, इस तस्वीर को देखकर अच्छे से समझा जा सकता है। कोरोना के कारण पिछले 11 महीने से बंद पड़ी लोकल ट्रेनें जब इस सोमवार को फिर से खोली गईं, तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कुछ लोग इतने भावुक हो उठे कि ट्रेन में चढ़ने से पहले माथा रखकर उसे चूमा। 

मुंबई. यह तस्वीर बताती है कि मुंबई में लोकल का कितना महत्व है। लोकल को मुंबई की लाइफ लाइन क्यों कहते हैं? कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने 11 महीने पहले लोकल ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया था। तब से लोगों को यूं लग रहा था, जैसे उनकी धड़कनों पर रोक लगा दी गई हो। अब जबकि कोरोना वैक्सीनेशन शुरू हो गया है और कोरोना कंट्रोल में आ चुका है, सोमवार से फिर से लोकल खोल दी गईं। जैसे ही लोकल की धड़धड़ आवाज स्टेशन पर गूंजी, लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस शख्स ने ट्रेन में चढ़ने से पहले गेट पर माथा रखकर उसे चूमा। यह तस्वीर बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा के अलावा कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं।

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मुंबईकरों में जैसे जोश उमड़ पड़ा
1 फरवरी को मुंबई लोकल खोले जाने के बाद फिर से स्टेशनों पर पहले जैसी चहल-पहल देखने को मिलने लगी है। लॉकडाउन हटने के बाद कुछ ट्रेने जरूरी सेवाओं के लिए खोली गई थीं। लेकिन अब आम यात्रियों के लिए चालू हो गई हैं। हालांकि अभी सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम चार बजे से रात नौ बजे तक केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को ही लोकल ट्रेन में यात्रा की अनुमति रहेगी।

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