विदेश मंत्री इसी महीने की शुरुआत में केन्या और कुवैत की अपनी यात्रा के दौरान दोहा में रूके थे। विदेश मंत्री ने नौ जून और 15 जून को दो बार दोहा में हाल्ट किया। कहा जा रहा है कि इस दौरान वह तालिबानी नेताओं से मिले। 

नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और तालिबान के शीर्ष नेताओं के बीच कथित बैठक की अटकलों को सरकार ने खारिज कर दिया है। भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि तालिबान के साथ के हुई बैठक की रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है।

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सोशल मीडिया पर कही जा रही यह बात

दरअसल, विदेश मंत्री इसी महीने की शुरुआत में केन्या और कुवैत की अपनी यात्रा के दौरान दोहा में रूके थे। विदेश मंत्री ने नौ जून और 15 जून को दो बार दोहा में हाल्ट किया। कहा जा रहा है कि इस दौरान वह तालिबानी नेताओं से मिले। 
हालांकि, सरकार ने बताया कि इस दौरान जयशंकर ने अपने समकक्ष मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी और रक्षा राज्य मंत्री खालिद बिन मोहम्मद अल अत्तिया से मुलाकात की थी। उन्होंने कतर के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद बिन अहमद अल मेस्नेद से भी मुलाकात की।
उधर, रिपोर्टों में दावा किया गया कि विदेश मंत्री और तालिबानी नेताओं के बैठकों के दौरान तालिबानी नेतृत्व ने जयशंकर को आश्वासन दिया कि भविष्य में भारत के साथ तालिबान के संबंध पाकिस्तान की इच्छा पर आधारित नहीं होंगे।

संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर आतंकवाद के खिलाफ किया आह्वान

एक हफ्ते पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक वर्चुअल संबोधन में एस.जयशंकर ने कहा कि अंतर-अफगान वार्ता ने अफगानिस्तान में हिंसा को कम नहीं किया है। अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए आतंकवादी सुरक्षित पनाहगाहों को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली एक वैध लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सामान्य स्थिति की बहाली सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान के साथ खड़ी है जो वहां स्थिरता के लिए आवश्यक है।
बता दें कि 19 साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तालिबान और अफगान सरकार कतर की राजधानी दोहा में सीधी बातचीत कर रहे हैं।