हिमाचल में रैगिंग और यौन उत्पीड़न की शिकार 19 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसने एक प्रोफेसर पर छेड़छाड़ और 3 साथी छात्राओं पर प्रताड़ना व मारपीट का आरोप लगाया था। पुलिस ने एंटी-रैगिंग एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश के एक सरकारी कॉलेज में रैगिंग और बेरहमी से पिटाई के बाद इलाज करा रही छात्रा की मौत के मामले में और भी जानकारी सामने आई है। छात्रा ने बयान दिया था कि एक टीचर उसका पीछा करके उसे परेशान करता था। बयान में यह भी कहा गया है कि प्रोफेसर अशोक कुमार ने गलत इरादे से उसके प्राइवेट पार्ट्स को छुआ। इस मामले में आरोपी बनाए गए तीनों लोग छात्रा के साथ फर्स्ट ईयर में पढ़ते थे। मृतक छात्रा फर्स्ट ईयर में फेल हो गई थी। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस 75, 115(2), 3(5) और एंटी-रैगिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पिता की शिकायत में कहा गया है कि प्रताड़ना सहन न कर पाने की वजह से उनकी बेटी डिप्रेशन में चली गई थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि 18 सितंबर को कॉलेज में उसके सिर पर बोतल से हमला किया गया और उसके बाल काट दिए गए। वहीं, पुलिस का कहना है कि घटना के बाद लड़की ने 7 अस्पतालों में इलाज कराया।

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19 साल की छात्रा की 26 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस को कल ही शिकायत मिली। छात्रा महीनों तक अस्पताल में इलाज करा रही थी। यौन उत्पीड़न समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। छात्राएं हर्षिता, आकृति, कोमोलिका और प्रोफेसर अशोक कुमार आरोपी हैं। मरने से पहले अस्पताल के बिस्तर से छात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने ऊपर हुए अत्याचारों के बारे में बता रही है।

उसकी मौत लुधियाना के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। वह धर्मशाला के गवर्नमेंट कॉलेज में ग्रेजुएशन की छात्रा थी। सर्वाइवर के जारी वीडियो में टीचर के बुरे बर्ताव और साथी छात्राओं के बुरे व्यवहार के बारे में बताया गया है। सर्वाइवर के पिता ने बताया कि बेटी की खराब हालत से मानसिक रूप से टूट जाने और इलाज को प्राथमिकता देने की वजह से उन्होंने इतने समय तक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।