केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब-हरियाणा के हजारों किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है। हालांकि किसानों को प्रदर्शन की इजाजत ना मिलने से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब-हरियाणा के हजारों किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है। हालांकि किसानों को प्रदर्शन की इजाजत ना मिलने से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। इसी बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों का समर्थन देते हुए कहा कि उन पर जुर्म बिल्कुल गलत है। अरविंद केजरीवाल ने गुरूवार को ट्वीट कर लिखा कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि बिल किसान विरोधी हैं।

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सीएम अरविन्द केजरीवाल ने कहा ये बिल वापस लेने की बजाय किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, उन पर वॉटर कैनन चलाई जा रही हैं। किसानों पर ये जुर्म बिल्कुल गलत है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है। 

किसानों के आन्दोलन को रोकने के लिए सीमा पर बैरीकेटिंग 
केन्द्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ किसानों के ‘दिल्ली चलो मार्च' को विफल बनाने के लिए हरियाणा ने पंजाब से सटी अपनी सीमा पर अवरोधक लगाए हैं और पड़ोसी राज्य के साथ बस सेवा भी निलंबित कर दी है। हरियाणा पुलिस ने किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए अंबाला और कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाटर कैनन का भी उपयोग किया। भाजपा शासित हरियाणा ने किसानों के ‘दिल्ली चलो मार्च' के मद्देनजर पंजाब के साथ अपनी बस सेवा बुधवार से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। 

सुखवीर सिंह बादल ने की पीएम मोदी से बात 
हरियाणा पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 संबंधी पाबंदियों के मद्देनजर वे इतनी बड़ी संख्या में लोगों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं। हरियाणा प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को जमा होने से रोकने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा भी लगाई है। इससे शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों की चिंताएं दूर करने का अनुरोध किया।