एयर इंडिया का 13 साल से लापता बोइंग 737 विमान कोलकाता एयरपोर्ट पर मिला। 2012 में ग्राउंड होने के बाद इसे भुला दिया गया और रिकॉर्ड से हटा दिया गया। यह पिछले प्रबंधन के तहत संपत्ति प्रबंधन में एक बड़ी चूक थी।

कोलकाता: एयर इंडिया के आधिकारिक रिकॉर्ड से 13 साल पहले गायब हुआ एक बोइंग 737 विमान आखिरकार कोलकाता एयरपोर्ट पर मिल गया है। इस विमान के बारे में एयर इंडिया को तब पता चला, जब कोलकाता एयरपोर्ट अधिकारियों ने इसे हटाने के लिए उनसे संपर्क किया। यह 43 साल पुराना बोइंग 737-200 जेट विमान है। इस खोज को एयर इंडिया के पिछले सरकारी मैनेजमेंट के दौरान संपत्ति प्रबंधन में एक बड़ी चूक माना जा रहा है। VT-EHH रजिस्ट्रेशन वाला यह विमान 1982 में इंडियन एयरलाइंस को सौंपा गया था। बाद में इसने अलायंस एयर के लिए उड़ान भरी और 2007 में एयर इंडिया ने इसे एक कार्गो विमान में बदल दिया।

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इंडिया पोस्ट के लिए उड़ान भरने वाला यह विमान 2012 में कोलकाता एयरपोर्ट पर ग्राउंड कर दिया गया था। लेकिन इसे बेचने या कबाड़ में भेजने के बजाय, हवाई पट्टी के एक कोने में छोड़ दिया गया। इसके साथ ही, यह विमान एयरलाइन के फिक्स्ड एसेट रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब हो गया। इस बीच, जब कोलकाता एयरपोर्ट अधिकारियों ने जगह के किराए की मांग करते हुए चिट्ठी भेजी, तो जवाब मिला कि हमारा ऐसा कोई विमान नहीं है।

आखिरकार एक चिट्ठी

जब कोलकाता एयरपोर्ट ने विमान को हटाने के लिए एयर इंडिया से संपर्क किया, तब जाकर एक विस्तृत आंतरिक जांच शुरू हुई। ऑडिट में इस बात की पुष्टि हुई कि लगातार कई सालों तक इस विमान को कई आधिकारिक रिकॉर्ड्स से बाहर रखा गया था। इस चूक के कारण, VT-EHH विमान की जानकारी डेप्रिसिएशन शेड्यूल, बीमा रिकॉर्ड, रखरखाव और वित्तीय रजिस्टरों में शामिल नहीं की गई थी।

एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को बताया कि निजीकरण से ठीक पहले के सालों में इस विमान को आंतरिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। नतीजतन, जब टाटा ग्रुप ने एयरलाइन का अधिग्रहण किया, तो उस समय हुए मूल्यांकन में यह विमान शामिल नहीं था। निजीकरण से पहले, एयर इंडिया के पास ऑपरेटिंग खर्च, बीमा देनदारियों, पार्किंग शुल्क और रखरखाव चक्रों को ट्रैक करने के लिए कोई एसेट रजिस्टर नहीं था। इसी चूक की वजह से यह विमान भुला दिया गया। इस विमान की तरह, VT-EGG नाम का एक और विमान भी कोलकाता में रखा गया था। VT-EGG को बाद में राजस्थान ले जाया गया, जहाँ यह अब एक एयरक्राफ्ट रेस्टोरेंट के रूप में चल रहा है।