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अनिल देशमुख के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी किया SC का रुख, हाईकोर्ट के CBI जांच के फैसले को किया चैलेंज

बांबे हाईकोर्ट ने एक दिन पहले सीबीआई को पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था। बांबे हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद महाराष्ट्र में सियासी भूचाला आ गया था।

Maharashtra Government moves Supreme Court against HC order directing CBI probe DHA
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Mumbai, First Published Apr 6, 2021, 4:53 PM IST
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मुंबई। बांबे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ महराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। बांबे हाईकोर्ट ने एक दिन पहले सीबीआई को पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था। बांबे हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद महाराष्ट्र में सियासी भूचाला आ गया था। अनिल देशमुख को कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सीबीआई भी आज जांच करने मुंबई पहुंचने वाली थी। उधर, अनिल देशमुख भी अपने खिलाफ आए बांबे हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने कहा है कि बांबे हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बगैर सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

दूसरे पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में लगाया कैबिएट
 
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के पहले ही उनके खिलाफ केस लड़ रही मुंबई की अधिवक्ता जयश्री पाटिल ने कैबिएट लगाते हुए यह अनुरोध किया है कि कोर्ट देशमुख या महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर कोई आदेश देने के पहले उनका भी पक्ष सुनें। 

सोमवार को देशमुख ने दिया था इस्तीफा 

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से सोमवार को इस्तीफा दिया है। बांबे हाईकोर्ट द्वारा गृहमंत्री के खिलाफ सीबीआई से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद देशमुख पर इस्तीफा का दबाव बढ़ गया था। साथ ही महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख पर पुलिस विभाग से सौ करोड़ रुपये उगाही का लक्ष्य देने का आरोप लगाया था। 

महाराष्ट्र के ताकतवर नेता हैं देशमुख

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ताकतवर नेताओं में अनिल देशमुख शुमार हैं। पांचवी बार से विधायक चुने जा रहे अनिल देशमुख एनसीपी कोटे से महाविकास आघाड़ी गठबंधन वाली महाराष्ट्र सरकार में गृहमंत्री हैं। विदर्भ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले 70 वर्षीय देशमुख भाजपा के फणनवीस सरकार के कार्यकाल को छोड़ दें तो 1995 से लगातार मंत्री हैं। देशमुख 1995 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कटोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। इसके बाद से वह 1999, 2004, 2009 व 2019 में जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2014 में अनिल देशमुख को हार का सामना करना पड़ा था।

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