24 अक्टूबर को पीएम मोदी पर बर्जिस देसाई की किताब 'मोदीज़ मिशन' लॉन्च होगी। यह जीवनी नहीं, बल्कि मोदी के 'बदलाव का ज़रिया' होने पर केंद्रित है। यह उनके वडनगर से PMO तक के सफर और भारतीय सोच में लाए गए बदलाव को दर्शाती है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी सफ़र पर आधारित 'मोदीज़ मिशन' नाम की एक किताब 24 अक्टूबर को लॉन्च होगी। मुंबई के वकील और लेखक, बर्जिस देसाई ने कहा कि यह किताब पीएम मोदी की राजनीति या चुनावों के बारे में नहीं है, बल्कि उनके एक "बदलाव के ज़रिया" होने के बारे में है। मेरी किताब, 'मोदीज़ मिशन' प्रधानमंत्री की एक और जीवनी नहीं है। न ही यह राजनीति, चुनाव या उनके किसी मौजूदा राजनीतिक विरोधी के बारे में है। यह काम पीएम नरेंद्र मोदी के एक विचार, एक आंदोलन, बदलाव के एक ज़रिया होने के बारे में ज़्यादा है। यह उस बदलाव के बारे में है जो उन्होंने भारतीयों की सामूहिक सोच में लाया है।

उन्होंने कहा- इस किताब का मकसद पश्चिमी मीडिया और भारतीय तबके (खास तबके) के एक हिस्से द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ बनाए गए नैरेटिव को दूर करना है।पिछले 24 सालों से वे सार्वजनिक पद पर हैं और इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय जीवन के हर पहलू को छुआ है। हम उनके इस विशाल काम को अभी तक पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। सबसे अहम बात यह है कि वे बदलाव का एक ऐसा ज़रिया बने हैं, जिसने देश की सामूहिक सोच को बदल दिया है। पश्चिमी मीडिया लगातार उनकी असाधारण कामयाबियों को कम करके आंकता है और भारत का एक बुद्धिजीवी तबका उनसे नाराज़ रहता है, इस धारणा को दूर करने की ज़रूरत थी।

किताब में वडनगर से नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय तक की कहानी

यह किताब, गुजरात के वडनगर में उनके शुरुआती सालों से लेकर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय तक के पीएम मोदी के सफ़र को दिखाती है। यह किताब सिर्फ़ एक जीवनी नहीं है, बल्कि इसे “एक विचार की कहानी”। किताब में दिखाया गया है कि कैसे पीएम मोदी अनगिनत चुनौतियों और मुश्किलों के बावजूद राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले एक ज़रिया के रूप में उभरे। बताते है कि पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे बड़े फैसले लेने के लिए कैसे एक सोचा-समझा तरीका अपनाया। कैसे पीएम मोदी ने सालों से भारत को एक गौरवशाली सभ्यता के रूप में विश्व स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रयास किए हैं।

आनंद महिंद्रा ने किताब को लेकर क्या कहा…

बर्जिस देसाई एक प्रमुख गुजराती दैनिक के पूर्व पत्रकार हैं। वह भारत की एक प्रमुख लॉ फर्म के मैनेजिंग पार्टनर के रूप में रिटायर हुए। बर्जिस कई किताबों के लेखक हैं, जिनमें पारसी संस्कृति पर समीक्षकों द्वारा प्रशंसित किताबें - 'ओह! दोज़ पारसीज़' और 'द बावाजी' शामिल हैं। किताब की प्रशंसा में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 21वीं सदी के उन नेताओं में से एक हैं जिन पर सबसे ज़्यादा नज़र रखी जाती है। यह किताब बताती है कि कैसे उन्होंने हमारे देश के प्रति अपने अटूट प्रेम के सहारे, लगातार ऊर्जा के साथ दुनिया में इसका मुकाम ऊंचा करने की कोशिश की है।”