फर्टिलाइजर प्लांट्स के पुनरुद्धार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए प्रयास के चलते भारत यूरिया उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहा है। पीएम 12 नवंबर को तेलंगाना के रामागुडम में फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन करेंगे। 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहा है। भारत में उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तेलंगाना के रामागुंडम में नए संयंत्र का निर्माण हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को रामागुडम की अपनी यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन करेंगे। पीएम ने 7 अगस्त 2016 को इसकी आधारशिला रखी थी।

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कृषि प्रधान देश होने के बाद भी भारत में फर्टिलाइजर प्लांट्स की स्थिति काफी खराब थी। बहुत से प्लांट्स कई साल से बंद थे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने फर्टिलाइजर प्लांट्स को फिर से खड़ा करने के लिए खास प्रयास किए। भारत को यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम द्वारा किए गए काम का असर दिख रहा है। भारत में यूरिया उत्पादन में तेजी आई है।

बरौनी प्लांट से शुरू हुआ यूरिया उत्पादन 
दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री ने गोरखपुर उर्वरक संयंत्र को राष्ट्र को समर्पित किया था। पीएम ने 22 जुलाई 2016 को इसकी आधारशिला रखी थी। यह संयंत्र 30 से अधिक वर्षों से बंद पड़ा था। 8600 करोड़ रुपए की लागत से इसका पुनर्निर्माण किया गया था। 

अक्टूबर में हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के बरौनी प्लांट ने भी यूरिया का उत्पादन शुरू किया था। बरौनी संयंत्र को फिर से यूरिया उत्पादन शुरू करने लायक बनाने में 8,300 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसकी क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।

63.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष बढ़ जाएगा यूरिया उत्पादन
प्रधानमंत्री ने 25 मई 2018 को एचयूआरएल की सिंदरी उर्वरक परियोजना के पुनरुद्धार की आधारशिला रखी थी। इसके भी जल्द चालू होने की उम्मीद है। उन्होंने 22 सितंबर 2018 को तालचर उर्वरक परियोजना के पुनरुद्धार की आधारशिला रखी थी। यह प्लांट कोल गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसके 2024 तक बनकर तैयार होने की संभावना है। 

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रामागुंडम, गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी और तालचर यूरिया संयंत्रों के संचालन के बाद भारत में यूरिया उत्पादन 63.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष बढ़ जाएगा। इससे यूरिया के आयात में कमी आएगी और देश यूरिया उत्पादन में आत्मानिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य के करीब पहुंचेगा।

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