Sadhguru's republic day message : सेव सॉइल आंदोलन का उद्देश्य दुनिया भर में मिट्टी के खतरनाक क्षरण के बारे में वैश्विक जागरूकता लाना है। खराब होती मिट्‌टी खाद्य और जल सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। जलवायु आपदा और विलुप्त होती प्रजातियां भी इसी मिट्‌टी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं। 

कोयंबटूर। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु (Sadhguru) दुनिया में खराब होती मिट्‌टी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं। बुधवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने मिट्‌टी बचाने के लिए Save soil movement चलाने की घोषणा की। गणतंत्र दिवस पर अपना संदेश देते हुए सद्गुरु ने कहा - कि हम सभी का कर्तव्य है कि मिट्टी को एक जीवित जीव के रूप में देखें और इसे भविष्य की विरासत के रूप में संजोकर रखें। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह हम सबकी मौलिक जिम्मेदारी है।

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युवा भारत का हर नागरिक आंदोलन में जुड़े
उन्होंने कहा कि यह गणतंत्र दिवस हमारे लिए अहम है, क्योंकि हम इस गणतंत्र दिवस पर आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह समय है कि युवा भारत की ऊर्जा को एक क्रियात्मक वास्तविकता में बदलें। सद्गुरु ने इस साल मार्च में मिट्‌टी बचाने के लिए वैश्विक आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने युवा भारत और हर नागरिक से इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की। 

क्यों चला रहे आंदोलन 
उन्होंने कहा कि सेव सॉइल आंदोलन का उद्देश्य दुनिया भर में मिट्टी के खतरनाक क्षरण के बारे में वैश्विक जागरूकता लाना है। खराब होती मिट्‌टी खाद्य और जल सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। जलवायु आपदा और विलुप्त होती प्रजातियां भी इसी मिट्‌टी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं। सद्गुरु ने स्वस्थ मृदा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मिट्‌टी कोई रासायनों का ढेर नहीं है, यह एक जीवित जीव है।

दुनियाभर में जागरूकता लाने की अपील
उन्होंने कहा कि इस ऊपरी मिट्टी के पहले 12 से 15 इंच में जो जीवन है, वह वास्तव में हमारे अस्तित्व का आधार है। यदि मनुष्य अपने अस्तित्व के आधार से सचेतन रूप से जुड़ा नहीं है, तो हम उन्हें जीवन की प्रकृति और सृष्टि के स्रोत के प्रति सचेत नहीं कर सकते। मैं चाहता हूं कि आप में से प्रत्येक इस आंदोलन में शामिल हों, इसे अपने आंदोलन के रूप में लें और इस देश में आवश्यक जागरूकता लाएं और दुनिया के बाकी हिस्सों में जागरूकता फैलाएं।

क्या है सेव सॉइल आंदोलन 
सेव सॉइल आंदोलन (मृदा बचाओ) 192 देशों में मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए नीतिगत पहलों को प्राथमिकता देगा। इस आंदोलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 3.5 अरब उन लोगों पर प्रभाव डालना है, जिनके पास मताधिकार है। यदि इस आंदोलन से वे प्रेरित हुए तो वे ऐसी सरकारें चुन सकेंगे, जो अपने देशों में इकोलॉजिकल संरक्षण को प्राथमिकता दें। 

UN ने दी चेतावनी, यही हाल रहा तो बंजर हो जाएगी जमीन
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा गति से लगातार मिट्टी का क्षरण 50 वर्षों से भी कम समय में दुनिया को गंभीर खाद्य संकट में डाल सकता है क्योंकि लाखों हेक्टेयर खेती योग्य भूमि बंजर हो जाती है और फसल पैदा करने में असमर्थ हो जाती है।

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